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Chandigarh News: सेक्टर-71 से एरोसिटी तक अस्पताल नहीं, निजी अस्पतालों की महंगी फीस और दूरी पड़ रही भारी

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मोहाली। शहर के तेजी से विकसित हो रहे सेक्टर-71 से लेकर एरोसिटी तक के विशाल आवासीय क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की घोर कमी अब सिर्फ एक असुविधा नहीं, बल्कि निवासियों के लिए एक गंभीर जोखिम बनती जा रही है। स्थानीय निवासियों को छोटी-मोटी बीमारियों से लेकर आपातकालीन स्वास्थ्य समस्याओं तक के लिए हर बार लंबी दूरी तय करके फेज-6 सिविल अस्पताल या महंगे निजी अस्पतालों तक पहुंचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
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इस पूरे बेल्ट में रहने वाले हज़ारों लोग स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं। स्थानीय रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन और विभिन्न सामाजिक संगठनों का कहना है कि सेक्टर-71 से एरोसिटी, सेक्टर-66बी और सेक्टर-82 तक के क्षेत्र में एक 24 घंटे कार्यरत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की आवश्यकता अत्यंत जरूरी है। आपातकाल स्थिति में निकटतम सरकारी स्वास्थ्य सुविधा तक पहुंचने में लगने वाला समय कई बार मरीज की जान को जोखिम में डाल देता है। लोगों ने प्रशासन से तुरंत सरकारी स्वास्थ्य विकल्प तैयार करने की अपील की है, क्योंकि निजी अस्पतालों की आसमान छूती फीस गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बजट से बाहर है।


अधर में लटके सरकारी प्रोजेक्ट्स
स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए प्रशासन की धीमी गति पर भी निवासियों ने चिंता जताई है। पुराने और अधर में लटके स्वास्थ्य प्रोजेक्ट्स, जैसे सेक्टर-66 में प्रस्तावित अस्पताल और सेक्टर-81 में एम्स के लिए अभी भी राज्य सरकार की तरफ से कोई स्पष्ट जवाब या दिशा-निर्देश आए हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इन बड़े प्रोजेक्ट्स में हो रही देरी से जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना मुश्किल हो रहा है।
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केस 1-
दो दिसबंर को बनूड़-लांडरा रोड पर सड़क हादसे में मनप्रीत सिंह घायल हो गया था। सिविल अस्पताल वहां से 15 किमी दूर है, जिसके बाद राहगीर जल्दबाजी में सोहाना स्थित निजी अस्पताल ले गए। जहां पर उसकी मौत हो गई।

केस-2
सेक्टर-84 के एक परिवार में नवजात बच्चा अचानक बेहोश हो गया। उसके मामा ने बच्चे और मां को बाइक से फेज-6 अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की। उन्होंने रास्ते में ट्रैफिक लाइट्स तक तोड़ीं लेकिन तब तक देर हो चुकी थी और बच्चे की जान नहीं बच पाई। पिता का कहना है कि पास में कोई अस्पताल होता तो शायद हमारा बच्चा जिंदा होता।
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