वहां का सालाना राजस्व 9,258 करोड़ रुपये है। दूसरी ओर, पंजाब को शराब से हर साल होने वाली कमाई पश्चिम बंगाल से भी कम है जबकि यहां खपत प्रति व्यक्ति 3.68 लीटर है। यहां 2016-17 में 4400 करोड़ रुपये और 2017-18 में 5150 करोड़ रुपये कमाई हुई। सूत्रों के मुताबिक अब पंजाब सरकार ने राज्य में शराब की थोक बिक्री को अपने हाथ में लेने पर विचार शुरू कर दिया है। इसके लिए सरकार एक कारपोरेशन का गठन कर सकती है। वित्त विभाग की विशेष टीम ने रिपोर्ट मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को सौंपी है, जिस पर जल्द ही फैसला आने की उम्मीद है।
यह होगा फायदा :
इस फैसले के मुताबिक डिस्टलरी और रिटेल कारोबार पहले की तरह निजी हाथों में ही रहेंगे। होलसेल का काम सरकार करेगी। इससे राजस्व बढ़ने के अलावा शराब माफिया की कमर भी टूटेगी। राज्य सरकार शराब के दाम खुद तय कर सकेगी। शराब के पूरे कारोबार पर परोक्ष रूप से सरकार की नजर रहेगी। थोक बिक्री की आड़ में मुनाफा अब निजी हाथों के बजाय सीधे सरकारी खजाने में पहुंचेगा।
पश्चिम बंगाल का मॉडल आया पसंद :
पश्चिम बंगाल सरकार को शराब कारोबार से 2016-17 में 5201 करोड़ रुपये की आमदनी हुई थी। राज्य सरकार ने इसके बाद वर्ष 2017-18 में शराब का थोक कारोबार अपने हाथों में लेकर एमआरपी पर एक्साइज ड्यूटी लगा दी। इस फैसले से पश्चिम बंगाल की एक ही साल में आमदनी बढ़कर 9258 करोड़ रुपये पर पहुंच गई।