हरियाणा की सड़कों पर डटे अन्नदाता के तीखे तेवरों से राज्य की राजनीति पल-पल करवट बदल रही है। कांग्रेस और इनेलो के पूरी तरह समर्थन में उतरने के बाद जजपा नेताओं के सियासी सुर भी बदले हैं। पार्षद, ब्लॉक समिति और जिला परिषद सदस्यों के इस्तीफों का सिलसिला लगातार जारी है।
जजपा के जो विधायक पहले दबी जुबान में आंदोलन का समर्थन कर रहे थे, वे अब खुलकर सामने आ गए हैं। अब तक तीन निर्दलीय व तीन जजपा विधायक किसानों के हक में आवाज बुलंद कर चुके हैं। जजपा विधायक जोगी राम सिहाग ने जहां चेयरमैन पद ठुकराया है, वहीं बेबाक विधायक राजकुमार गौतम ने रविवार को केंद्र सरकार को खरी-खरी सुनाई। जजपा विधायक अमरजीत ढांडा ने भी किसानों की मांगों का खुला समर्थन किया है।
निर्दलीय विधायक बलराज कुंडू तो पहले से ही किसानों के समर्थन में थे, चेयरमैन का पद छोड़कर सोमबीर सांगवान ने चंद दिन पहले ही सरकार से समर्थन वापस लिया है। विधायक धर्मपाल गोंदर भी किसानों के आंदोलन को जायज ठहरा चुके हैं। उन्होंने तो यहां तक कह दिया है कि पहले किसान हैं, उसके बाद विधायक का पद।
अगर आंदोलन लंबा खिंच गया तो जजपा के कुछ और तथा अन्य निर्दलीय विधायक भी समर्थन में उतर सकते हैं। इससे गठबंधन सरकार पर दबाव और बढ़ेगा। अभी तो सरकार पर कोई आंच नहीं है, लेकिन आंदोलन का रुख व किसानों, केंद्र सरकार के बीच चल रही वार्ता के परिणाम के बाद जजपा अंतिम फैसला लेने के संकेत पहले ही दे चुकी है।
किसान जजपा की मजबूत नींव
हरियाणा में किसानों को जननायक जनता पार्टी की मजबूत नींव माना जाता है। चौधरी देवीलाल के जमाने से लोकदल व इनेलो के साथ जुड़े बड़े किसान परिवार बीते विधानसभा चुनाव में जजपा के साथ आ गए थे। इसकी वजह से पार्टी ने 10 सीटें जीतीं। जजपा किसी सूरत में इन्हें खुद से छिटकने नहीं देना चाहती, इसलिए किसानों की मांगों को मानने की बात जजपा नेता बार-बार कह रहे हैं।
भाजपा कर रही नए कानूनों का समर्थन
हरियाणा भाजपा नए कृषि कानूनों को किसान हित में बताकर उनका समर्थन कर रही है। कृषि मंत्री जेपी दलाल इन कानूनों को किसानों के लिए वरदान बता रहे हैं। उनका कहना है कि इनके दूरगामी परिणाम होंगे। किसानों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी। इनसे न तो एमएसपी, न ही मंडियों पर असर पड़ेगा।