चंडीगढ़। मेयर चुनाव में अब महज तीन दिन का समय बचा है और नगर निगम की राजनीति पूरी तरह गरमा गई है। सत्ताधारी भाजपा 18 पार्षदों के साथ भले ही सबसे बड़ा दल है लेकिन पार्टी के भीतर ही दो पार्षदों को लेकर आशंका गहराने लगी है। सूत्रों के अनुसार आम आदमी पार्टी भाजपा के कुछ नाराज पार्षदों को अपने पाले में करने की कोशिश कर सकती है। इनमें एक पार्षद टिकट न मिलने से नाराज बताया जा रहा है जबकि एक महिला पार्षद को लेकर भी संदेह जताया जा रहा है। हालात इतने संवेदनशील हैं कि पार्षदों को शहर से बाहर भेजे जाने की चर्चा है। हालांकि, इस पर पार्टी के नेता खुलकर कुछ कहने से बच रहे हैं।
यदि आम आदमी पार्टी भाजपा के दो पार्षद तोड़ने में सफल होती है तो चुनावी गणित पूरी तरह बदल सकता है। ऐसी स्थिति में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच चल रही तल्ख बयानबाजी भी थम सकती है और दोनों दल एकजुट होकर मैदान में उतर सकते हैं। कांग्रेस फिलहाल पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है और आम आदमी पार्टी की अगली चाल का इंतजार कर रही है। भाजपा को आशंका है कि मतदान के दिन कांग्रेस आम आदमी पार्टी का समर्थन कर सकती है। दो अतिरिक्त पार्षद मिलने पर आप-कांग्रेस गठबंधन मजबूत हो जाएगा जिससे मुकाबला बेहद रोचक हो जाएगा। क्रॉस वोटिंग की स्थिति में नतीजे किसी भी दिशा में जा सकते हैं।
इसी आशंका के चलते भाजपा भी आम आदमी पार्टी की तर्ज पर अपने पार्षदों को सुरक्षित स्थान पर रखने की तैयारी में जुटी है। मौजूदा समीकरण के तहत निगम सदन में भाजपा के 18, आम आदमी पार्टी के 11, कांग्रेस के छह पार्षद और एक सांसद का वोट है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता संभाल रहे मोर्चा
भाजपा के वरिष्ठ नेता लगातार उन पार्षदों के संपर्क में हैं जिन पर संदेह जताया जा रहा है। चुनाव पर्यवेक्षक विनोद तावड़े पूरे घटनाक्रम पर नजर रखे हुए हैं, जबकि प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र पाल मल्होत्रा भी बैठकों के जरिए पार्षदों को एकजुट रखने में जुटे हैं।
आप पार्षदों पर कड़ी निगरानी
आम आदमी पार्टी ने अपने पार्षदों को पंजाब के गढ़शंकर स्थित रिजॉर्ट में ठहराया है। बताया जा रहा है कि वहां फोन के इस्तेमाल पर सख्ती है और केवल परिजनों से बात की अनुमति दी जा रही है। पिछली बार भी यही रणनीति अपनाई गई थी।
आरक्षण बदले वार्ड बने चुनौती
आरक्षण में बदलाव से प्रभावित वार्डों के पार्षद सभी दलों के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। वरिष्ठ नेताओं को डर है कि कहीं ऐसे पार्षदों को साधकर विरोधी दल चुनावी समीकरण न बिगाड़ दें।