बुखार से पीड़ित मरीज और पीपीई किट पहने स्वास्थ्य विभाग की टीम।
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सेक्टर 34 फर्नीचर मार्केट में रविवार को एक अमानवीय घटना सामने आई। बुखार से तप रहा एक मरीज दिनभर बरामदे में पड़ा रहा और स्वास्थ्यकर्मी उसे अस्पताल ले जाने के बजाय पल्ला झाड़ते रहे। शाम को आखिरकार पुलिस ने मरीज को सेक्टर 45 स्थित अस्पताल पहुंचाया, जहां उसे बुखार की दवा देकर भेज दिया गया।
फर्नीचर मार्केट के दुकानदार अनिकेत ने बताया कि सुबह 11 बजे बीमार बुजुर्ग को बरामदे में पड़ा देखा तो 112 नंबर पर कॉल करके सूचना दी। इसी बीच तब तक क्षेत्रीय थाना पुलिस आ गई। पुलिस ने सेक्टर 35 की डिस्पेंसरी में फोन कर एंबुलेंस बुलाई। एंबुलेंस में एक महिला व चालक आया। महिला ने वहां मौजूद लोगों से मरीज को एंबुलेंस में रखवाने में मदद मांगी तो कोरोना के डर से लोगों ने इनकार कर दिया। इस पर महिला की लोगों से बहसबाजी हो गई। गुस्से में महिला बिना मरीज को लिए वहां से एंबुलेंस में बैठकर रवाना हो गई।
करीब एक घंटे बाद दूसरी एंबुलेंस वहां पहुंची। इसमें तमाम स्टाफ ने पीपीई किट पहन रखी थी। टीम ने मरीज की जांच कर बताया कि उसे कोरोना नहीं है। ऐसे में इसे सामान्य अस्पताल में भर्ती कराना होगा। यह टीम भी मरीज को वहीं छोड़कर चली गई। स्वास्थ्यकर्मियों के इस तरह के रवैये से दुकानदार गुस्से में भर गए। उन्होंने फिर पुलिस को फोन किया। शाम करीब साढ़े तीन बजे पुलिस ही मरीज को सेक्टर 45 स्थित अस्पताल लेकर गए, जहां उसका उपचार कराया गया। दुकानदार अनिकेत ने बताया कि मरीज शायद कोई गरीब बेसहारा था।
कोरोना टीम सिर्फ संक्रमित मरीजों के लिए
कोरोना की टीम किसी मरीज को लेकर तभी जाएगी, जब उसे कोरोना होगा। हालांकि सेक्टर 35 डिस्पेंसरी की टीम मरीज को लेकर क्यों नहीं गई, इसकी जानकारी ली जाएगी।
-वीके नागपाल, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, जीएमएसएच-16