सबसे खतरनाक 'कामिनी' सात साल में पहली बार नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की पकड़ में आई है। चौंकिए नहीं, कामिनी कोई ड्रग माफिया या गैंगस्टर नहीं, बल्कि एक दवा है, जिसका इस्तेमाल नशे के लिए होने लगा है। असल में यह एक शक्तिवर्धक दवा है, लेकिन इसका अधिक इस्तेमाल नशेड़ियों को सरूर देता है और धीरे-धीरे इसकी आदत पड़ जाती है। हालांकि चंडीगढ़ के ड्रग विभाग ने यह दवा पकड़ी है जो कालोनी एरिया में बेची जा रही थी, लेकिन एनसीबी ने सात साल में इसे पहली बार पकड़ा।
एनसीबी के आंकड़ों के मुताबिक 2017 में चंडीगढ़ रीजन से कामिनी गोलियां बड़ी मात्रा में पकड़ी गईं। इनकी संख्या करीब एक लाख 34 हजार गोलियां थी, जिनका वजन करीब 72 किलो रहा। हालांकि इस रीजन में सबसे ज्यादा हेरोइन की तस्करी हुई। एनसीबी ने सात साल में इस बार सबसे ज्यादा नशा तस्करी के 77 केस दर्ज किए, जिसमें 41 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की चंडीगढ़ यूनिट हरियाणा, पंजाब, हिमाचल और राजस्थान में नशा तस्करों की धरपकड़ करती है।
2011 से नवंबर 2017 तक के आंकड़ों में सामने आया कि इस रीजन में सबसे ज्यादा हेरोइन पकड़ी गई। 136 किलो हेरोइन एनसीबी ने पकड़ी और कुछ केस में बीएसएफ का भी सहयोग रहा। हेरोइन के बाद चरस की तस्करी सबसे ज्यादा हुई। इस साल करीब 41 किलो चरस अलग-अलग मामलों में पकड़ी गई।
इस साल केस ज्यादा, मात्रा कम
एनसीबी ने इस साल केस तो पिछले साल के मुकाबले ज्यादा दर्ज किए, लेकिन रिकवर हुए नशे की मात्रा कम रही। इस साल 77 केस में 41 आरोपी गिरफ्तार हुए। 2016 में 57 केस में 58 आरोपी पकड़े गए थे। 2017 में साढ़े 40 किलो चरस पकड़ी गई, जबकि 2016 में यह मात्रा 48 किलो थी। इसी तरह इस दफा 136 किलो हेरोइन पकड़ी, जबकि 2016 में यह मात्रा 148 किलो थी। सबसे ज्यादा 285 किलो हेरोइन 2014 में पकड़ी गई।
आयुर्वेदिक दवाओं का नशे में इस्तेमाल
इस बार एनसीबी ने करीब 15 किलो ऐसी आयुर्वेदिक दवाएं पकड़ीं, जिनका इस्तेमाल नशे के लिए किए जा रहा था। हिमाचल के जंगली क्षेत्र में कुछ ऐसे पौधे होते हैं, जिनसे बननी तो लाभदायक दवा होती हैं, लेकिन नशा तस्कर उनका गलत इस्तेमाल करते हैं।