चंडीगढ़। बैंकिंग और डिजिटल फ्रॉड से आम लोगों की कमाई हथियाई ली जा रही है। इस स्थिति को बदलने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया स्कूली बच्चों और आम लोगों को जागरूक तो कर ही रहा है साथ ही ऐसे नियम बना रहा है जिससे ठगों पर रोक लगा सके।
फिलहाल बैंकों और ग्राहकों को डिजिटल फ्राड से बचने के लिए फाइनेंशियल फ्राड रिस्क इंडिकेटर है। आरबीआई की ओर से समय-समय पर ग्राहकों के साथ ही बैंकों को भी अलर्ट जारी किया जाता है। आरबीआई ऐसे नियम बना रही है जिससे पैसा ट्रांसफर करते समय ग्राहक ही तय कर सकेगा कि रिसीवर रकम को कब तक इस्तेमाल कर सकेगा। ग्राहक जैसे ही किसी खाते में पैसा ट्रांसफर करेगा तो बैंक अतिरिक्त सहमति मांगेगा कि क्या यह राशि अगले एक घंटे में उपयोग की जा सकती है। ग्राहक अनुमति देता है तो पैसा एक घंटे के भीतर फंक्शनल हो जाएगा और ग्राहक अनुमति नहीं देगा तो यह राशि 24 घंटे तक सिस्टम में फ्रीज रहेगी। उस अवधि में एटीएम निकासी या डिजिटल ट्रांसफर भी संभव नहीं हो सकेगा।
कई खातों में घुमा देते हैं पैसा
फ्रॉड होते ही अपराधी चंद मिनटों में रकम को कई खातों में घुमा देते हैं या फिर एटीएम से निकाल लेते हैं या फिर डिजिटल वालेट में डालकर उसे ट्रेस करना मुश्किल बना देते हैं। चूंकि पैसा 24 घंटे तक सिस्टम में रुका रहेगा। ऐसे में बैंक व साइबर सेल को अलर्ट करके खाते फ्रीज करने का पूरा समय मिलेगा।