चंडीगढ़। फायर सर्विस विभाग में पदोन्नति को लेकर विवाद पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गया है। हाईकोर्ट ने आरक्षण के आधार पर जूनियरों को पदोन्नत करने को चुनौती देने वाली याचिका पर चंडीगढ़ प्रशासन व अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
नवीन कुमार व अन्य याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि उनसे जूनियर कर्मचारियों को आरक्षण के आधार पर लीडिंग फायरमैन के पद पर पदोन्नत कर दिया गया जबकि पदोन्नति में आरक्षण देने के लिए आवश्यक सांविधानिक शर्तों का पालन नहीं किया गया। 25 मई 2026 के आदेश के तहत विभिन्न प्रतिवादियों को लीडिंग फायरमैन के पद पर प्रमोट किया गया। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कर्मचारी उनसे कनिष्ठ जूनियर हैं, फिर भी उन्हें पदोन्नति का लाभ दिया गया। याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट विकास चतरथ ने अदालत को बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न फैसलों के अनुसार पदोन्नति में आरक्षण देने से पहले संबंधित विभाग को यह साबित करना होता है कि संबंधित वर्ग का प्रतिनिधित्व सेवाओं में पर्याप्त नहीं है। इसके लिए ठोस आंकड़े और अध्ययन आवश्यक होते हैं। चंडीगढ़ प्रशासन ने ऐसा कोई डाटा एकत्र नहीं किया और न ही सेवा में प्रतिनिधित्व की कमी संबंधी कोई सामग्री रिकॉर्ड पर मौजूद है। इसके बावजूद आरक्षण के आधार पर पदोन्नति दे दी गई, जो कानून और संविधान के प्रावधानों के विपरीत है। याची पक्ष की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका पर चंडीगढ़ प्रशासन सहित पदोन्नत हुए कर्मियों को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। साथ ही नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि क्यों न आदेश पर रोक लगा दी जाए।