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Chandigarh News: पुलिसकर्मी बनकर लोगों के गहने उड़ाने वाले ईरानी गिरोह का सरगना गिरफ्तार

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चंडीगढ़। सेक्टर-36 थाना पुलिस ने ईरानी गिरोह के एक सरगना को गिरफ्तार कर धोखाधड़ी और चोरी के चार मामलों को सुलझाने का दावा किया है। गिरोह के सदस्य पुलिसकर्मी बनकर बुजुर्ग महिलाओं को लुटने का डर दिखाते थे और फिर उनके गहने लेकर रफूचक्कर हो जाते थे। पकड़े गए आरोपी की पहचान मध्य प्रदेश निवासी अमजद अली उर्फ गब्बर अली उर्फ भूरू (46) के रूप में हुई है।पुलिस ने आरोपी से यूपी के फर्जी नंबर वाली एक पल्सर मोटरसाइकिल, अपराध में इस्तेमाल बैग और कैप, एक फर्जी पहचान पत्र, सीबीआई का फर्जी पहचानपत्र और देसी कट्टा और चार गोलियां बरामद की गईं हैं। पुलिस ने दावा किया है कि यह गिरोह चंडीगढ़, हरियाणा, महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली और एनसीआर समेत देश के कई राज्यों में धोखाधड़ी और लूट की वारदातो में शामिल और वांछित है। पकड़े गए आरोपी अमजद अली के तीन बच्चे हैं और उसके खिलाफ वर्ष 2020 से 2022 के बीच गुजरात में सात केस दर्ज हैं।
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पुलिस ने इस गिरोह के कुछ अन्य सदस्यों की भी पहचान कर ही है, जिन्होंने चंडीगढ़ में वारदातों को अंजाम दिया है। पुलिस उनकी तलाश में पुलिस जुटी है। गैंग के सदस्यों ने पुलिसकर्मी बनकर चंडीगढ़ में धोखाधड़ी की वारदातों को अंजाम दिया था। गिरोह के सदस्य पुलिसकर्मी बनकर बुजुर्ग महिलाओं से कहते थे कि शहर झपटमारी की वारदात बढ़ गई है इसलिए वह अपने गहने उतारकर पर्स आदि में रख लें। जब बुजुर्ग महिलाएं गहने उतारती थीं तो गिरोह के सदस्य धोखे से असली गहने लेकर नकली थमाकर फरार हो जाते थे। पुलिस ने मामले में एसआईटी गठित कर जांच की और वारदात वाली जगहों और आसपास की सीसीटीवी फुटेज के आधार पर गिरोह के सुराग जुटाए। पकड़े गए आरोपी की गिरफ्तारी सेक्टर-42 की लेक के पास से दिखाई गई है।

पुलिस ने ये मामले सुलझाए
- 24 नवंबर 2022 और 8 दिसंबर 2022 धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश रचने की धाराओं में को सेक्टर 17 थाने में केस दर्ज हुआ था
- 18 दिसंबर 2022 को इंडस्ट्रियल एरिया थाने धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया था
- 3 मई 2023 को आपराधिक स्तर पर विश्वासघात और धोखाधड़ी की धाराओं में सेक्टर-36 थाने में दर्ज केस किया गया था


बाक्स:
ईरान से आए थे पुरखे, देशभर में फैला है गिरोह
पुलिस के मुताबिक, करीब 400 साल पहले अफगानिस्तान के रास्ते घोड़े पर सवार होकर कुछ परिवार ईरान से भारत व्यापार करने आए थे। ये परिवार भोपाल (मध्य प्रदेश) में बस गए। धीरे-धीरे इन परिवारों की संख्या बढ़ने लगी। ये लोग शादियां भी आपस में करते हैं। करीब 16 साल पहले ईरानी परिवारों के युवाओं ने अपना मूल पेशा छोड़कर अपराध जगत में कदम रखा और इनकी पहचान ईरानी गिरोह के रूप में होने लगी। फिलहाल भारत में लगभग 350 ईरानी परिवार हैं। इनके 400 से 500 युवा इस गिरोह के सदस्य हैं। पुलिस का कहना है कि ईरानी मूल के होने के कारण गिरोह के सदस्यों की कद-काठी अच्छी होती है। ऐसे में यह आसानी से नकली पुलिस अफसर बन जाते हैं। गिरोह आगरा टीम के नाम से भी जाना जाता है और ज्यादातर बुजुर्ग लोगों को अपना निशाना बनाता है। अपराध को अंजाम देकर गिरोह के सदस्य तत्काल शहर छोड़ देते हैं और अपने निवास स्थान पर पहुंच जाते हैं। गिरोह के सदस्य महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के महंगे होटलों में भी ठहरते थे।
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