चंडीगढ़। टैगोर थिएटर में वीरवार को तीन दिवसीय नाट्य उत्सव के दूसरे दिन नाटक बंद गली के आखिरी मकान का मंचन हुआ। धर्मवीर भारती के लिखे नाटक का निर्देशन प्रोफेसर देवेंद्र राज अंकुर ने किया। एक घंटा 35 मिनट के इस नाटक में एनएसडी रेपर्टरी कंपनी के कलाकारों ने मंचन किया। नाटक में दिखाया गया कि एक तंग और घुटन भरी गली में बसे एक समुदाय की कहानी है। यहां के लोग जीवन की उलझनों और संघर्षों से जूझते हैं। यहां पर उनके सपने और आकांक्षाएं गरीबी और सामाजिक अन्याय से टकराती हैं।
कहानी के केंद्र में एक ऐसा समुदाय है जो निम्न वर्ग से आता है। अपने हालात से बाहर नहीं निकल पा रहा। उनके रिश्तों में प्रेम, विश्वासघात और त्याग जैसी भावनाओं की जटिलताएं दिखती हैं। कहानी की शुरुआत मुंशीजी के लंबे रोग के एक दिन से होती है। उनके माध्यम से उनके परिवार और उनके आसपास की सामाजिक स्थितियों के कई राज उजागर होते हैं।
मुंशीजी के साथ बिरजा नाक की एक ब्राह्मण महिला है। उन्होंने 15 साल पहले अपने पति को छोड़ दिया और मुंशीजी के साथ रहना शुरू कर दिया। मुंशीजी स्वयं एक अविवाहित व्यक्ति हैं। बिरजा की मां हरदेई है। वह मुंशीजी में ईश्वर का स्वरूप देखती हैं। बिरजा का बड़ा बेटा राघो राम सौतेले पिता की पूजा करता है। उसका दूसरा बेटा, हरी राम जन्मजात चोर है और हमेशा परिवार के लिए समस्याएं खड़ी करने को तैयार रहता है।
मुंशीजी के जीवन में और भी कई पात्र हैं, जो उनके साथ जीवन की कठिनाइयों और खुशियों को साझा करते हैं। यह कहानी एक पतली दीवारों वाले आखिरी मकान पर आधारित है। जो गली के अंत में स्थित है। मुंशीजी का जीवन भी इसी तरह का है। गली के आखिरी मकान की तरह सीमित और संकुचित। मुंशीजी भी उस अंतिम मकान की तरह बन जाते हैं। नाटक में राजेश सिंह, शिल्पा भारती, पूजा गुप्ता, सत्येंद्र मलिक, अनंत शर्मा, शिव प्रसाद, मधुरिमा, शिवानी भारतीय, हीरालाल राय और सुमन कुमार ने अभिनय किया।