चंडीगढ़। पंजाब के राज्यपाल और यूटी चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने चंडीगढ़ प्रशासन के शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित एक समारोह में 198 नवनियुक्त प्रशिक्षित स्नातक शिक्षकों (टीजीटी) को नियुक्ति पत्र सौंपे। यह कार्यक्रम सेक्टर 42 स्थित गवर्नमेंट काॅलेज में आयोजित किया गया।
राज्यपाल ने पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया आयोजित करने में विभाग का प्रभावी ढंग से नेतृत्व करने के लिए मुख्य सचिव राजीव वर्मा की सराहना की। इस कदम से 2,197 प्रशिक्षित स्नातक शिक्षकों की मौजूदा क्षमता में भी इजाफा होगा, जिससे शहर भर के सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता में और वृद्धि होगी। नियुक्ति प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए पिछले एक साल से लगी टीम को प्रशंसा प्रमाण पत्र भी दिए गए।
मौजूदा समय में चंडीगढ़ का शिक्षा विभाग 111 सरकारी स्कूलों की देखरेख करता है, जिसमें लगभग 1.5 लाख छात्र पढ़ते हैं। इनमें से 62,021 छात्र माध्यमिक और वरिष्ठ माध्यमिक स्तर पर नामांकित हैं।
इस कार्यक्रम में यूटी चंडीगढ़ के मुख्य सचिव राजीव वर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। प्रेरणा पुरी, सचिव शिक्षा, और हरसुहिंदर पाल सिंह बराड़, निदेशक स्कूल शिक्षा भी उपस्थित थे।
शिक्षक एक मजबूत समाज की नींव होते हैं
अपने संबोधन में कटारिया ने कहा कि आज का अवसर केवल नियुक्ति पत्र वितरित करने का नहीं है, बल्कि राष्ट्र निर्माण की यात्रा में एक नया अध्याय शुरू करने का है। शिक्षा केवल रोजगार का साधन नहीं है, यह समाज को सही दिशा में ले जाने का सबसे शक्तिशाली साधन है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षक एक मजबूत समाज की नींव होते हैं, जो आने वाली पीढ़ियों के विचारों, मूल्यों और भविष्य को आकार देते हैं। उन्होंने कहा जीवन में सबसे बड़ा गुरु मां होती है। एक शिक्षक का जीवन में वही स्थान होता है, जो अंधकार में दीपक का होता है। एक गुरु की भूमिका छात्रों को परीक्षा की तैयारी कराने तक ही सीमित नहीं है, यह उनके पूरे जीवन की दिशा निर्धारित करता है।
कभी भी सीखना बंद नहीं करना चाहिए
नवनियुक्त शिक्षकों को संबोधित करते हुए कटारिया ने उनसे रोल मॉडल बनने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आपका काम, आचरण और प्रेरणा आपके विद्यार्थियों के जीवन को आकार देगी। आपके कार्य आपको सशक्त बनाएंगे। एक शिक्षक केवल ज्ञान का स्रोत नहीं है, बल्कि एक विचारशील, अनुशासित और नैतिक रूप से ईमानदार समाज का निर्माता है। उन्होंने आगे कहा कि शिक्षकों को कभी भी सीखना बंद नहीं करना चाहिए। जिस दिन एक शिक्षक सीखना बंद कर देता है, उसी दिन वह पढ़ाना भी बंद कर देता है।