चंडीगढ़। वार्ड नंबर-3 में आने वाले सेक्टर-26 की पुलिस कॉलोनी, टीटीटीआई कॉलोनी, पॉलिटेक्निक कॉलोनी से हर चुनाव में नेता वोट तो लेते रहे, लेकिन इन इलाकों का विकास करने के नाम पर वे हाथ खड़े कर देते हैं। कहते हैं कि पुलिस विभाग व अन्य संबंधित विभाग ही इन इलाकों में काम करा सकते हैं।
पुलिस लाइन और पुलिस थाना कॉलोनी में करीब 2300 मतदाता हैं। इसी तरह वाटर वर्क्स कॉलोनी और पॉलिटेक्निक कॉलोनी में 750 मतदाता हैं। इसके अलावा बारदाना कॉलोनी और ग्रेन मार्केट में भी करीब 750 मतदाता हैं। पुलिस कॉलोनी में सेवानिवृत्त पुलिस कर्मचारी चुनाव में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। इन इलाकों की भी अपनी कई समस्याएं हैं, जिन्हें दूर करने के लिए लोग लंबे समय से मांग कर रहे हैं। पार्षद चुनाव जीतते हैं, लेकिन पुलिस कॉलोनी में काम करने के मुद्दे पर वह गेंद पुलिस वेलफेयर के पाले में डाल देते हैं। अब फिर चुनाव सिर पर हैं। प्रत्याशी वोट मांगने जा रहे हैं तो उन्हें पुरानी बातें याद दिलाई जा रही हैं।
लोगों का कहना है कि पुलिस कॉलोनी में नेता 2016 में चुनावी पर्चे बांटने आए थे, उसके बाद अब आए हैं। यहां की समस्याओं पर कभी किसी पार्षद ने ध्यान नहीं दिया। पुलिस लाइन वार्ड का हिस्सा है, लेकिन चुनाव के बाद इसे अलग कर दिया जाता है।
मैदान में नौ उम्मीदवार, पुलिस लाइन से सिर्फ एक
चुनाव में इस बार वार्ड नंबर-3 से नौ उम्मीदवार मैदान में हैं। सात उम्मीदवार बापूधाम, एक सेक्टर-30 और एक उम्मीदवार पुलिस लाइन से है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वार्ड से जो खड़े होते हैं, वे सभी बापूधाम के होते हैं। वे पुलिस लाइन की समस्याओं को समझ नहीं पाते हैं। इसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ता है।
पुलिस लाइन के लोगों का वोट के लिए इस्तेमाल हो रहा : अजय
पुलिस लाइन से आजाद उम्मीदवार के तौर पर खड़े अजय कुमार गौतम ने कहा कि पुलिस लाइन के लोगों का इस्तेमाल सिर्फ वोट लेने के लिए किया जाता है। पार्षद होने का यहां के लोगों को कोई लाभ नहीं मिलता, जबकि अगर पार्षद चाहे तो बहुत कुछ पुलिस लाइन व अन्य कॉलोनियों के लिए कर सकता है। वह पुलिस लाइन के हालातों को सुधारने के लिए ही चुनाव में उतरे हैं। अगर वह चुनाव जीतते हैं तो पार्कों के अंदर ओपन एयर जिम, साफ-सफाई की व्यवस्था, पार्किंग की समस्या आदि को प्राथमिकता के आधार पर ठीक करेंगे।