उग्रवादियों से लोहा लेते हुए शहीद हुए सैनिक सुखचैन सिंह को सोमवार को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। शहीद का पार्थिव शरीर अमृतसर से उनके पैतृक गांव इस्लामवाला लाया गया।
इस मौके पर उपमण्डल अधिकारी सुभाष खटक, सांसद शेर सिंह घुबाया और सैन्य अधिकारियों ने अंतिम विदाई दी। शहीद सुखचैन सिंह को छोटे चचेरे भाई भूपिंदर सिंह ने मुख्याग्नि दी। शहीद की अंतिम यात्रा में आसपास लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए। बता दें कि सुखचैन सिंह सन् 2009 से 19 सिख रेजीमेंट में लांस नायक के तौर पर ड्यूटी कर रहे थे।
शनिवार सुबह लगभग 6 बजे गश्त के दौरान सेना के जवानों और उग्रवादियों के बीच मुठभेड़ हो गई थी। इस दौरान सुखचैन सिंह गंभीर रूप में घायल हो गए थे। हालांकि उन्हें इलाज के लिए सैन्य अस्पताल ले जाया गया। जहां उन्होंने शहादत प्राप्त की। सुखचैन सिंह अपने पीछे माता-पिता के अलावा पत्नी, तीन वर्ष की बेटी और 6 महीने का पुत्र छोड़ गए हैं। शहीद के चचेरे भाई भूपिन्दर सिंह ने सरकार से मांग की है कि शहीद की याद में गांव में एक स्टेडियम बनाया जाए और शहीद के बच्चों को सरकारी नौकरी दिलवायी जाए।