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अमर उजाला शिक्षा अभियान: नए सत्र में मिड-डे मिल की भोजन सूची बदलेगी, केला-दूध भी आहार में होगा शामिल

Fri, 01 Apr 2022 01:45 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

शिक्षा निदेशक पालिका अरोड़ा ने बताया कि खाने की गुणवत्ता जांच के लिए स्कूल शिक्षक की जिम्मेदारी लगेगी। इसके अलावा अभिभावक कभी भी स्कूल आकर बच्चों को दिए जा रहे भोजन की जांच कर सकते हैं।
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फाइल फोटो
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विस्तार
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चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में अब बच्चों को पौष्टिक आहार देने के लिए शिक्षा विभाग नए प्रयास कर रहा है। लगभग दो साल के बाद स्कूलों में अब नए सत्र में मिड-डे मील शुरू होगा। अभी तक अभिभावकों को बच्चों के लिए कच्चा राशन और मसाले दिए जा रहे थे। अब स्कूलों में तैयार की गई रसोई घरों में ही बच्चों के लिए ताजा खाना बनेगा। शिक्षा विभाग भोजन सूची भी बदलने जा रहा है। इसके लिए न्यूट्रिशन एक्सपर्ट को रखा जाएगा।

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बच्चों की उम्र के अनुसार उनके लिए भोजन सूची में डाइट बनाई जाएगी। बच्चों को प्रोटीन से भरपूर खाना देने के लिए केला, दूध, अंडा या लस्सी में से किसी एक को हर दिन खाने में शामिल किया जाएगा। कोरोना महामारी के बाद प्रोटीन व विभिन्न विटामिन से भरपूर पौष्टिक खाने की मांग बढ़ गई है। बच्चों की सेहत को देखते हुए शिक्षा विभाग भी बच्चों के लिए आहार को पौष्टिक बनाने पर काम कर रहा है।

इसके लिए मिड-डे मिल को पौष्टिक बनाने के साथ स्कूल कैंटीन में जंक फूड समोसा, पैटीज, कोल्डड्रिंक इत्यादि बंद करने पर भी काम चल रहा है। स्कूल कैंटीन में जंक फूड की जगह जूस, लस्सी और पोहा इत्यादि खाने की सामग्री को रखा जाएगा। विभाग न्यूट्रिशन और खाने के एक्सपर्ट की मदद से हेल्पर्स और बावर्ची को ट्रेनिंग देंगे, जिससे वे खाने को बेहतर बनाएं और बच्चों के लिए खाना सेहतमंद होने के साथ स्वादिष्ट भी हो।
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विभाग ने स्कूलों से मांगी है बच्चों की रिपोर्ट
शहर के सरकारी स्कूलों में नर्सरी से आठवीं तक के बच्चों को मिड-डे मील दिया जाता है। इसे लेकर शिक्षा निदेशक ने स्कूलों के साथ बैठक की थी और उनसे रिपोर्ट मांगी है कि मिड-डे मील की श्रेणी में कितने छात्र हैं। इसके अलावा शहर के आठ स्कूलों में नई मिड डे मील रसोई भी तैयार की जा रही है। शहर के स्कूलों में नर्सरी से आठवीं तक के तकरीबन पांच लाख के करीब विद्यार्थी पढ़ रहे हैं।

अभिभावक भी जांच कर सकेंगे खाना
शिक्षा निदेशक पालिका अरोड़ा ने बताया कि खाने की गुणवत्ता जांच के लिए स्कूल शिक्षक की जिम्मेदारी लगेगी। इसके अलावा अभिभावक कभी भी स्कूल आकर बच्चों को दिए जा रहे भोजन की जांच कर सकते हैं।

स्कूलों को निर्देश हैं कि वे अपने किचन गार्डन तैयार कर लें। किचन गार्डन की सब्जियों और सलाद को मिड-डे मील में काम में लिया जाएगा। शहर के कई सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में अभी किचन गार्डन सब्जियां तैयार की जा रही हैं। कोरोना महामारी के कारण लगी पाबंदियों के चलते अभी तक स्कूल अभिभावकों को कच्चे राशन के साथ सब्जियां भी दे रहे थे।

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