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छात्र संघ चुनाव विजेताओं का पहला लक्ष्य पीयू की प्लेसमेंट के ग्राफ में सुधार

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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ चुनाव में केवल कांग्रेस की छात्र इकाई नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) ही दबदबा कायम रख सका। हालांकि उसे भी पिछले चुनाव से एक सीट का नुकसान झेलना पड़ा। पिछले चुनाव में अध्यक्ष पद छोड़कर बाकी तीनों पदों पर एनएसयूआई काबिज रही थी लेकिन इस बार उसे केवल उपाध्यक्ष और संयुक्त सचिव के पद पर ही संतोष करना पड़ा। बाकी पीयू में लंबे समय से चुनाव लड़ रहे सभी छात्र संगठन साफ हो गए।
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विवि में इस बार आम आदमी पार्टी की छात्र इकाई छात्र युवा संघर्ष समिति (सीवाईएसएस) के अलावा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी), (सथ), पीएसयू ललकार, पंजाब यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (पूसू), अकाली दल की स्टूडेंट इकाई स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया (सोई) और स्टूडेंट्स फॉर सोसाइटी (एसएफएस) भी मैदान में थे लेकिन इनमें से किसी के भी उम्मीदवार का खाता नहीं खुला जबकि पहली बार छात्र राजनीति में उतरी सीवाईएसएस ने इतिहास रचते हुए अध्यक्ष पद पर कब्जा जमा लिया। सीवाईएसएस पीयू में दो पदों पर चुनाव में उतरी थी। अध्यक्ष के अलावा संयुक्त सचिव पद पर संगठन ने भव्या को मैदान में उतारा था। उन्होंने भी शानदार प्रदर्शन कर एनएसयूआई को कड़ी टक्कर दी और दूसरे नंबर पर रहीं।
एनएसयूआई के चुनाव प्रभारी हुसैन सुल्तानिया ने संगठन के कार्यकर्ताओं की मेहनत से दो सीटों पर जीत दर्ज करने पर खुशी जाहिर की। उन्होंने अन्य दो सीटों पर एनएसयूआई में पीछे रहने का कारण हरियाणा और पंजाब में संबंधित संगठनों की सरकार होने होने को बताया और कहा कि इन सरकारों ने अपने उम्मीदवारों को जीतवाने के लिए सरकारी मशीनरी लगा रखी थी। उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं की मेहनत को सराहा।
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छात्रहित में काम करने का मिला सुखद परिणाम, अब पूरे साल करेंगे काम : आयुष खटकड़
पीयू छात्रसंघ चुनाव में विजयी सभी पदाधिकारियों ने छात्रों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल कराने की बात कही। नवनिर्वाचित अध्यक्ष आयुष खटकड़ ने कहा कि अब तक जिन पुराने छात्र संगठनों ने चुनाव जीते वह कभी भी अपने वादे पर खरे नहीं उतरे इसलिए इस बार छात्रों ने बदलाव के लिए मतदान किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2013 से हम सक्रिय रहे हैं। वर्ष 2017 में मैंने पंजाब विवि में दाखिला लिया। हम लोगों ने तभी से छात्रों की हितों के लिए काम किया, जिसका परिणाम अब आपके सामने है। दिल्ली में अरविंद केजरीवाल और पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत मान बढ़िया काम कर रहे हैं। आम आदमी पार्टी की नीतियों के कारण युवाओं का रुझान पार्टी और संगठन की ओर बढ़ा है। पंजाब यूनिवर्सिटी में हम इन्फ्रास्ट्रक्चर, महिला सुरक्षा, नए छात्रावासों की जो मांग रखी गई है, उसे पूरा कराएंगे।
कैंपस में मूलभूत सुविधाएं बढ़ाने का करेंगे काम : हर्षदीप सिंह बाठ
उपाध्यक्ष पद पर निर्वाचित एनएसयूआई के हर्षदीप सिंह बाठ ने कैंपस में मूलभूत सुविधाओं को बढ़ाने पर जोर देने की बात कही। कहा कि स्टूडेंट्स की समस्याओं को हल कराने के लिए वह तत्पर हैं। विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात में सुधार, इंटर-डिपार्टमेंट कल्चरल गतिविधियों को प्रमोट करना उनकी प्राथमिकता सूची में हैं।
प्लेसमेंट में सुधार समेत अन्य सुविधाएं मुहैया कराना लक्ष्य : प्रवेश बिश्नोई
महासचिव पद पर चुने गए इनसो के प्रवेश बिश्नोई ने पंजाब यूनिवर्सिटी के सभी छात्रों का आभार जताते हुए कहा कि उनका उद्देश्य प्लेसमेंट में सुधार, हॉस्टल का अपग्रेडेशन करना, सभी विभागों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाना है। इसके अलावा छात्रों की अन्य सभी समस्याओं के समाधान के लिए वह हर संभव प्रयास करेंगे।
खेल इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार कराऊंगा : मनीष बूरा
संयुक्त सचिव पद पर जीते एनएसयूआई के मनीष बूरा ने कहा कि वह विवि में खेल इंफ्रास्ट्रक्चर में और सुधार करना चाहते हैं। इसके लिए हर संभव प्रयास करेंगे। इसके अलावा साउथ कैंपस की सुविधाओं में सुधार, आईएएस सेंटर में बेहतर कोचिंग सुविधा उपल्बध करवाना उनका लक्ष्य है। इसके अलावा छात्रों की अन्य समस्याओं को हल करवाने का पूरा प्रयास करेंगे।
1. पद : अध्यक्ष : आयुष खटकर
- उम्र : 23
- संगठन : युवा छात्र संघर्ष समिति
- विभाग : यूआईएलएस
- वोट : 2712
- जीत का अंतर : 660 वोट
2. पद : उपाध्यक्ष : हर्षदीप सिंह बाठ
- उम्र : 23
- संगठन : एनएसयूआई
- विभाग : पंजाबी
- वोट : 3514
- जीत का अंतर : 239
3. पद : महासचिव : प्रवेश बिश्नोई
- आयु : 22
- संगठन : इनसो
- विभाग : यूआईएलएस
- वोट : 4275
- जीत का अंतर : 1144
4. पद : संयुक्त सचिव : मनीष बूरा
- उम्र : 22
- संगठन : एनएसयूआई
- विभाग : कानून विभाग
- वोट : 3151
- जीत का अंतर : 741
भाई-भतीजावाद और खराब चुनाव प्रबंधन से डूबी एबीवीपी की नैया
पीयू छात्रसंघ चुनावों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् (एबीवीपी) इस बार भी एक भी सीट नहीं जीत पाई। कोरोना काल में एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने काफी सक्रिय होकर विवि परिसर में काम किया। चंडीगढ़-हरियाणा और पीयू सीनेट-सिंडिकेट में भाजपा की सरकार है। इसके बावजूद एबीवीपी चुनाव जीतने में नाकाम रही। छात्रों के मुताबिक, एबीवीपी की हार के मुख्य कारण हरियाणा सरकार में मंत्री का भतीजा होना, सोशल मीडिया पर चुनाव से दो दिन पहले लड़कियों की ओर से एबीवीपी के समर्थकों की चैट लीक करना रहा। वहीं अन्य संगठनों के मुताबिक एबीवीपी का इलेक्शन मैनेजमेंट बहुत खराब रहा, संगठन के कार्यकर्ता अध्यक्ष पद की दौड़ में आठ उम्मीदवार होने के बावजूद अपनी जीत को लेकर पहले से ही आश्वस्त होकर चल रहे थे।
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