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चुनावी ड्यूटी और फसली सीजन की व्यवस्था बनी चुनौती

Wed, 17 Sep 2014 12:06 AM IST
अमर उजाला/ ब्यूरो, कुरुक्षेत्र
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लोकसभा की तरह हरियाणा में फसल-सीजन और विधानसभा चुनाव एक साथ होना किसानों, आढ़तियों व प्रशासनिक अधिकारियों के लिए चुनौती भरा रहेगा।
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जाहिर है चुनावी ड्यूटी आने पर अधिकारियों की प्राथमिकता चुनाव संबंधी सौंपी जिम्मेदारी निष्ठा से पूरा करना होगा। लेकिन मार्केट सचिव सहित अन्य पदाधिकारियों को चुनाव ड्यूटी के लिए चुना जाना न सिर्फ अधिकारियों, बल्कि किसानों एवं आढ़तियों के लिए भी मुश्किलें खड़ी करेगा।

गौरतलब है कि आमतौर पर मंडियों में पेयजल, शौचालय और सड़कों की मरम्मत सहित उठान प्रमुख समस्या रहती है। जो किसानों और आढ़तियों के लिए परेशानी का सबब बनती है।
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रही बात अधिकारियों की, उन्हें तो हर सीजन में किसी न किसी समस्या को लेकर किसानों के रोष का सामना करना पड़ता है।

ऐसे में चुनाव आयोग की ड्यूटी एवं सीजन में व्यवस्था-प्रबंधन अधिकारियों के लिए एक कड़ी चुनौती से कम नहीं। वहीं कुछ आढ़तियों के अनुसार सीजन 10 से 12 दिन पहले शुरू कर इस समस्या से निपटा जा सकता था।

उल्लेखनीय है हरियाणा विधानसभा चुनाव 15 अक्तूबर को होने तय है, जबकि एक अक्तूबर से प्रदेश भर में सीजन भी शुरू हो रहा है।

गेहूं सीजन के दौरान थे लोकसभा चुनाव
देश में जब लोकसभा चुनाव का शंखनाद हुआ था, तो उस दौरान हरियाणा में गेहूं का सीजन था। एक अप्रैल से सीजन आरंभ हुआ, जबकि लोकसभा चुनाव 10 अप्रैल को हुए। इसका असर मंडियों में साफ देखने को मिला, क्योंकि मतदान के बाद ही गेहूं की आवक ने जोर पकड़ा था।
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एक अक्तूबर से शुरु होगी सरकारी खरीद
हरियाणा सरकार ने प्रदेश भर की मंडियों में धान की सरकारी खरीद एक अक्तूबर से शुरू करने के आदेश दिए हैं। सरकारी आदेशों में कहा गया है कि प्रदेश में एक अक्तूबर से सीजन शुरू होगा और एजेंसियां खरीद कार्य आरंभ करेंगी।

वहीं सरकार ने मंडियों में उचित प्रबंध करने के भी आदेश जारी किए हैं, ताकि किसानों और व्यापारियों को समस्याओं से दोचार न होना पड़ें।
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