चंडीगढ़। बुजुर्ग सिमरनजीत कौर मंगलवार सुबह 6 बजे सेक्टर-40 स्थित अपने आवास से पास के गुरुद्वारे में जा रही थीं तभी कुत्ते ने काट लिया। शहर में लावारिस कुत्तों का आतंक बढ़ता जा रहा है। मुख्य सड़कों से लेकर गली-मोहल्लों तक कुत्तों के झुंड दिखाई देते हैं। कुत्ते काटने के मामले रोज सामने आ रहे हैं लेकिन नगर निगम इस समस्या से निपटने में पूरी तरह असफल रहा है।
निगम की तरफ से कुत्तों का टीकाकरण, नसबंदी और पंजीकरण का दावा महज कागजी खानापूर्ति बनकर रह गया है। ऐसे में कुत्तों के आतंक से लोग दहशत में हैं। कुत्तों के हमले का सर्वाधिक शिकार महिलाएं और बच्चे बन रहे हैं। इससे शहर के कई इलाकों के लोग परेशान हैं। पार्षदों की तरफ से कई बार सदन में ये मुद्दा उठाया जा चुका है। बीते दिनों प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल के साथ हुई बैठक में भी ये मुद्दा उठा था लेकिन जमीनी स्तर पर कोई असर दिखाई नहीं दे रहा है। लोग या तो कुत्तों का शिकार हो रहे हैं या फिर उनकी वजह से दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं। लोगों का कहना है कि शहर में अब आवारा कुत्तों की जनसंख्या बेहद ज्यादा हो गई है। ये शहर के हर गली, मोहल्ले, पार्कों और फुटपाथों पर फिरते रहते हैं जिससे आम लोगों में इनका भय बना रहता है। ये वाहनों के पीछे भी भागते रहते हैं, जिस कारण कई बार वाहन चालकों का संतुलन बिगड़ जाता है और वे हादसे का शिकार हो जाते हैं। आतंक इतना ज्यादा बढ़ गया हैं कि छोटे बच्चे पार्कों में जाने से डरने लगे हैं।
केस 1
सेक्टर-35बी में रहने वाले नवी चंद्र सोमवार रात करीब 8.10 बजे आईएसबीटी-17 से घर की तरफ जा रहे थे। वह बस स्टैंड की सड़क पर शिव मंदिर के पास से गुजर रहे थे, तभी पीछे एक कुत्ते ने उनके पैर को अपने जबड़े में जकड़ लिया और काट दिया। पैर से तेज खून निकलता देख उन्होंने पुलिस को फोन किया। पुलिस उन्हें जीएमएसएच-16 ले गई। उन्होंने बताया कि जिस कुत्ते ने उन्हें काटा है, वह पहले भी कई लोगों को काट चुका है। नवी ने नगर निगम को भी शिकायत दी है।
केस 2
गुरुद्वारा जाते समय बुजुर्ग को काटा
75 वर्षीय सिमरनजीत कौर मंगलवार सुबह 6 बजे के करीब सेक्टर-40 स्थित अपने घर से पास के गुरुद्वारे में जा रही थीं। वह पार्क के अंदर से गुजर रही थीं। अचानक एक कुत्ते ने उनके एड़ी में काट लिया। उन्होंने बताया कि सेक्टर-40 सी और डी के पार्क में हमेशा तीन-चार कुत्ते बैठे रहते हैं। पहले भी उन्होंने कई लोगों को काटा है।
लाख रुपये खर्च सेमिनार पर खर्च, परिणाम शून्य
वर्ष 2019 में तत्कालीन प्रशासक वीपी सिंह बदनौर के कहने पर नगर निगम ने लावारिस कुत्तों की समस्या से निपटने को एक राष्ट्रीय स्तर का सेमिनार आयोजित किया था। इस पर लाखों रुपये खर्च किए गए थे। इस दौरान विशेषज्ञों ने कहा था कि खतरनाक नस्ल के कुत्तों को पालने पर प्रतिबंध लगाया जाए, फीमेल डॉग की नसबंदी की जाए, नसबंदी का रिकॉर्ड रखा जाए ताकि दवा का असर खत्म होने के बाद उस कुत्ते की तत्काल वैक्सीनेशन की जा सके। कुत्तों के खरीदने व बेचने का रिकॉर्ड बने, जागरूकता शिविर लगाए जाएं और वैक्सीन लगाने वाली दुकानों का पंजीकरण हो। अब तक इनमें से एक भी सुझाव पर अमल नहीं हुआ और न ही कोई बैठक बुलाई गई। पूरी योजना फाइलों में ही दब कर रह गई।
कुत्ता काटने पर यह रखें ध्यान
- साबुन से जख्म को रगड़ कर साफ पानी में धोएं
- जख्म पर पट्टी न करें, उसे खुला रखें
- पट्टी करने पर रैबीज के विषाणु अंदर ही अंदर फैलने का खतरा बन जाता है
- चिकित्सकों के अनुसार दस दिन के भीतर एंटी रैबीज की पहली वैक्सीन लग जानी चाहिए
- दूसरी वैक्सीन तीन दिन बाद और तीसरी वैक्सीन सात दिन बाद लगनी चाहिए