भले ही यूटी प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने चंडीगढ़ को देश की पहली कैशलेस सिटी बनाने का प्रयास करने का दावा किया हो, मगर हकीकत कुछ और ही है। सीटीयू के पास कैशलेस टिकटिंग के लिए अभी कोई प्लान नहीं है। यही नहीं लोकल रूट पर चलने वाली 400 बसों के लिए जुलाई में जो इलेक्ट्रॉनिक टिकट मशीनें (ईटीएम) खरीदी थीं वे भी अभी शुरू नहीं की जा सकी हैं। मात्र 5 लंबे रूट की बसों पर ही ये मशीनें शुरू की जा सकीं हैं।
सीटीयू ने 70 लाख रुपये की लागत से 900 ईटीएम मशीनें खरीदी थीं, मगर न तो कंडक्टरों को ट्रेनिंग दी गई और न ही इन मशीनों का संचालन हो पाया, जबकि मैनुअल टिकट में कई बार गड़बड़ी की शिकायत आ चुकी है। अगर ये मशीनें चल जातीं तो सीटीयू में सफर करने वाले डेढ़ लाख लोगों को किलोमीटर के हिसाब से टिकट लेनेे में किसी तरह का कोई कन्फ्यूजन नहीं होगा।
कैशलेस टिकटिंग के लिए अभी प्लान नहीं
कैशलेस टिकटिंग के लिए अभी कोई प्लान नहीं बनाया गया है। ईटीएम भी अभी लोकल रूट पर नहीं शुरू की जाएगी। इसके लिए कंडक्टर को पहले प्रशिक्षित किया जाएगा। इसकेे बाद ये मशीनें लोकल रूट की बसों में शुरू की जा सकेंगी।
अमित तलवार, डायरेक्टर , सीटीयू