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सीनेट चुनाव की घोषणा से पीयू में बना माहौल : भाजपा व कांग्रेस ने झोंकी ताकत, कोई किसी से कम नहीं

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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी में सीनेट चुनाव की बिसात पूरी तरह बिछ चुकी है। एक तरफ भाजपाई तो दूसरी तरफ कांग्रेसी हैं। दोनों ही दलों के प्रत्याशियों ने चुनाव जीतने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। यह चुनाव दोनों ही दलों के सदस्यों के लिए खास होगा, क्योंकि कांग्रेस ने काफी संघर्ष के बाद सीनेट चुनाव का रास्ता साफ करवाया है। वहीं भाजपा अपना प्रभाव कायम करने के लिए पूरी ताकत लगा रही है।
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कांग्रेसियों का सीनेट में रहा है दबदबा
पिछले रिकॉर्ड पर नजर डालें तो सीनेट में कांग्रेसी सदस्यों का दबदबा रहा है। यहां बहुमत से अधिक सदस्य उनके पास रहे हैं। माहौल को बदलने की कला भी उनके पास है। यही नहीं पुटा में भी उनका अच्छा दखल है, शिक्षकों के हितों से जुड़े मुद्दे पुटा उन्हीं के जरिए हल करवाती है। लंबे समय से सीनेट में अपना दबदबा कायम रखने वाले कांग्रेस के सदस्यों को सबसे अधिक पसीना चुनाव करवाने के लिए बहाना पड़ा है। उन्होंने लगभग सात माह तक संघर्ष किया। धरना-प्रदर्शन से लेकर हाईकोर्ट तक पहुंचे। एक लड़ाई में तो वह कामयाब रहे, लेकिन अब असली चुनौती चुनाव जीतने की है। हालांकि उनके पास बेहतर रणनीतिकार हैं। प्रो. नवदीप गोयल, अशोक गोयल, प्रो. केशव मल्होत्रा जैसे सदस्य खुलकर बैटिंग करते हैं। वह चुनावी माहौल को बदलने में भी महारथ रखते हैं। माना जा रहा है कि कांग्रेस कैंपस की दस सीटों को अपने पाले में करने में कामयाब रही तो सीनेट में फिर से उनका दबदबा बन सकता है। कैंपस के शिक्षक काफी संख्या में गोयल ग्रुप से जुड़े हुए हैं।
इस तरह भाजपा बना रही है रणनीति
भाजपा के सदस्य पिछले साल से सीनेट में अधिक सक्रिय हुए। उन्होंने पीयू कैंपस के हितों की बात हो या फिर शिक्षकों की, उस पर उन्होंने खुलकर बहस की। यहां तक कि कांग्रेस के कुछ सदस्यों पर आरोप भी लगाए। अपने सदस्यों को पीयू की कुछ सीटों पर विराजमान करने के लिए भी कोशिश की। सीनेट में होने वाले हंगामे व बहुमत को दूर करने के लिए भाजपाई एकजुट हुए। डीएसडब्ल्यू की तैनाती के प्रकरण ने भाजपा के सदस्यों को काफी हद तक एक करने की कोशिश की। अब चुनावी बिसात बिछ चुकी है। भाजपा इस बार चांसलर कार्यालय से 32 सदस्य अपने लाकर सीनेट में दबदबा कायम करने की कोशिश कर रही है। सूत्रों का कहना है कि यदि 32 सदस्य पक्के भाजपा के रहे और डीएवी ग्रुप ने उनका साथ दिया तो फिर सीनेट का नजारा इस बार बदल सकता है, क्योंकि डीएवी के पास भी कम से कम दस सदस्य होते हैं। ऐसे में सीनेट में बहुमत बनाने में भाजपा कामयाब हो सकती है। भाजपा के खिलाड़ियों में प्रमुख रूप से डॉ. सुभाष शर्मा माने जाते हैं। सपोर्ट के लिए पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भाजपा संजय टंडन से लेकर कई लोग उनके साथ खड़े हैं।
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