करवा चौथ का पर्व धूमधाम से मनाया गया। इस दिन सुहागिनों ने पति की लंबी उम्र की कामना करते हुए व्रत रखा और करवा की पूजा की। शाम को चांद और पिया के दीदार के बाद सुहागिनों ने व्रत खोला।
इस दौरान बाजारों में खूब रौनक रही। लेकिन सबसे अधिक भीड़ ब्यूटी पार्लरों, चूड़ियों और शृंगार की दुकानों पर देखने को मिली। सुहागिनों ने करवा चौथ का व्रत रखकर पति की लंबी की कामना की। अल सुबह चार बजे उठकर महिलाओं ने जहां सरंगी का सेवन किया।
वहीं सुबह स्नान इत्यादि के बाद महिलाओं ने टोलियों मेें बैठकर करवा चौथ की कथा सुनी। इसके अलावा महिलाओं ने मंदिरों में जाकर भगवान गणेश की आराधना की।
ट्विन सिटी में महिला मंडलियों द्वारा विभिन्न प्रतियोगिता कार्यक्रमों का आयोजन किया, जिनमें महिलाओं ने बढ़चढ़ कर भाग लिया। दोपहर तक बाजार में मेहंदी लगवाने के लिए भी भीड़ देखी गई।
पौराणिक कथाएं सुनकर की पति की लंबी आयु की कामना
ज्योतिषाचार्य पंडित महेश शांडिल्य ने बताया कि करवा चौथ के उपलक्ष्य में अनेक पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। ग्रंथों की मान्यता के मुताबिक करवा चौथ के दिन पौराणिक कथा सुनने से विवाहिताओं को सदा सुहागिन का फल मिलता है। पुराणों के अनुसार करवा नाम की एक पतिव्रता धोबिन अपने पति के साथ तुंगभद्रा नदी किनारे रहती थी। एक दिन जब वह नदी किनारे कपडे़ धो रही थी, तभी अचानक एक मगरमच्छ वहां आया और धोबी के पैर अपने दांतों में दबाकर यमलोक की ओर ले जाने लगा।
वृद्ध पति यह देखकर घबरा गया और अपनी पत्नी को करवा-करवा कह कर पुकारने लगा। पति की पुकार सुनकर करवा वहां पहुंची और उसने मगरमच्छ को धागे से बांध दिया। मगरमच्छ को लेकर यमराज के द्वार पहुंची। उसने यमराज के समक्ष पति की रक्षा के लिए गुहार लगाई। साथ ही मगरमच्छ को कठोर दंड देने की मांग की। जब यमराज ने मगरमच्छ को कठोर दंड देने में असमर्थता जताई, तो करवा ने उसे ही श्राप देने की बात कह डाली। करवा का साहस देखकर यमराज भी डर गया।
इसके उपरांत मगरमच्छ को यमपुरी भेज दिया तथा साथ ही करवा के पति को दीर्घायु होने का वरदान दिया। तभी से कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को करवा चौथ का व्रत प्रचलन में आया।
मान्यता है कि एक पौराणिक कथा के मुताबिक एक बार लक्ष्मी जी के वाहन उल्लू ने उनसे पूछा कि आपकी सब जगह पूजा होता है, मेरी क्यों नहीं। तो लक्ष्मी जी ने कहा कि मुझ से 11 दिन पहले तेरी भी पूजा होगी। तभी से दीवाली से 11 दिन पहले करवा चौथ पर उल्लू की पूजा की जाती है।
तंबोला खेल व नाच गाकर कर मनाया जश्न
करवा चौथ के उपलक्ष्य में ज्योति होटल में महिलाओं द्वारा पर्व धूमधाम से मनाया गया। होटल डायरेक्टर मीनू वर्मा, स्वामी विवेकानंद शिक्षण संस्थान की डायरेक्टर मंजीत कांबोज, महक वर्मा, आक्षी कांबोज, गुंजन गुप्ता की अध्यक्षता में यहां विभिन्न कार्यक्रम हुए। इस दौरान तंबोला, डांडिया डांस और मस्ती सहित संगीत कार्यक्रम हुए। इस दौरान एक मिनट का शो बहुत ही रोचक रहा जिसमें एक मिनट में दर्जनों फोटो में से अपने पति की फोटो उठानी होती है का सुहागिनों ने खूब लुफ्त उठाया। इस दौरान सुहागिनों के पति भी मौजूद रहे जिन्होंने अपनी अर्धांगिनी की खूब प्रशंसा की।
चांद ने कराया लंबा इंतजार
सुहागिनों ने करवा चौथ का व्रत रात को 8 बजकर 32 मिनट पर चांद देखने के बाद खोला। लेकिन दिन ढलने के बाद से ही सुहागिनों का इंतजार लंबा होता चल गया। सुहागिनों को चांद देखने के लिए बार-बार छत पर जाते देखा गया। व्रतधारी महिलाओं का ध्यान बंटाने के लिए उनके परिजनों को उनके साथ पुरानी यादें ताजा करते देखा गया। आसमान में चांद निकलने के बाद सुहागिनों ने विधिवत रूप से चांद को अर्घ्य दिया और पूजा अर्चना के बाद पति के हाथों से पानी पीकर व्रत खोला।