हरियाणा में अब स्कूलों व कॉलेजों में ही मृदा व पानी की जांच होगी। यहीं से किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड भी मिलेगा। मृदा स्वास्थ्य कार्ड पूरे प्रदेश में 70 लाख एकड़ क्षेत्र के लिए हर तीन साल में जारी किए जाएंगे। ताकि किसान को उसकी भूमि की उर्वराशक्ति की जानकारी हो और उसके अनुसार वह फसल की बिजाई कर सके।
हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री जय प्रकाश दलाल ने बताया कि कृषि में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य इस बात को ध्यान में रखकर निर्धारित किया गया है कि किसान एक उत्पादक के साथ-साथ उद्यमी भी बने। इस दिशा में सरकार द्वारा व्यापक स्तर पर योजनाएं भी बनाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि जब किसान और खेती उद्योग के रूप में आगे बढेंगी। तो बड़े स्तर पर गांव और गांव के पास ही रोजगार व स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे।
उन्होंने कहा कि किसानों से जुड़ी जितनी भी समस्याएं और सुधार हैं, को छोटे किसानों को केंद्र बिंदु मानकर कृषि के सशक्तीकरण के साथ जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों की आढ़तियों पर निर्भरता कम करने के लिए नई-नई योजनाएं लाई जा रही हैं।
इस बार गेहूं व सरसों की रबी फसलों की खरीद प्रक्रिया में नई व्यवस्था की गई और पहली बार किसानों के खाते में फसल बिक्री का भुगतान किया गया। हालांकि पहले किसानों का यह भुगतान आढ़ती के माध्यम से होता था और किसान को पता नहीं होता था कि उसका कितना पैसा आया है।