यूएस ने 1999 में आतंकवादी संगठन सूची में डाला
यूरोप से फंड एकत्रित हुआ तो रोडे का संगठन दो हिस्सों में बंट गया। एक की कमान रोडे ने तो दूसरे का नेतृत्व दूसरी समिति के पूर्व सदस्य सतिंदरपाल सिंह गिल ने किया। एक समय था कि यूके व कनाडा में रोडे के संगठन का बोलबाला होने लगा तो यूएस ने खतरा देखकर 1999 में अमेरिकी विदेश विभाग के वैश्विक आतंकवाद के वार्षिक पैटर्न में आईएसवाईएफ को एक सक्रिय आतंकवादी संगठन के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। इससे रोडे को कुछ समय के लिए धक्का लगा और उसका संगठन जर्मनी, यूके व आसपास के देशों में ही रह गया।
केंद्रीय एजेंसियों के मुताबिक रोडे के पास टीम काफी मजबूत थी। विदेश में आईएसवाईएफ के विभिन्न गुटों के अन्य महत्वपूर्ण नेताओं में अमरीक सिंह गिल, ब्रिटेन में संपादक रघवीर सिंह जोहल, बलविंदर सिंह चहेरू, परमिंदर सिंह बल और अवतार सिंह कूनर कमान संभालकर रखते थे। जबकि कनाडा में, लखबीर सिंह रोडे के अलावा, सतिंदरपाल सिंह अध्यक्ष और बलबीर सिंह बराड़ सचिव थे।
आईएसआई करती थी रोडे का इस्तेमाल
पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) ने लंबे समय से रोडे का समर्थन किया। रोडे का ही पहला आतंकवादी समूह था जिसने लश्कर-ए-तैयबा के मूल संगठन मार्केज-दावत-वार-इरशाद के विचारकों के साथ बातचीत की थी। एजेंसियों के रिकॉर्ड के मुताबिक रोडे ने तब अब्दुल करीम टुंडा और ख्वाजा मोइन से मुलाकात की थी। 1985 व 2001 में एयर इंडिया की उड़ानों में आतंकवादी घटना इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन ने ही की थी। इसे देखकर 27 मार्च, 2001 को यूके ने इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन पर प्रतिबंध लगा दिया था।
2002 में भारत में भी इस संगठन को आतंकवादी संगठन करार दिया गया और केंद्र सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया। 2006 में भारी मात्रा में आरडीएक्स व अन्य हथियार जालंधर में मिले थे। इसमें लखबीर सिंह रोडे का भतीजा जसविंदर सिंह भी गिरफ्तार किया गया था। 16 सितंबर 2021 को कपूरथला के एसएसपी रहे हरकंवलप्रीत खख ने आतंकी साजिश को बेनकाब किया था। पुलिस ने लखबीर सिंह रोडे के भतीजे गुरमुख सिंह को गिरफ्तार कर एक टिफिन बम और पांच हथगोले समेत काफी हथियार पकड़े थे।
कनाडा से आएगा परिवार, गांव में होगी अरदास
लखबीर सिंह के छोटे भाई जत्थेदार जसबीर सिंह रोडे ने बताया कि पिछले दो दिसंबर को लखबीर के बेटे ने कनाडा से उनकी मौत की सूचना दी। लखबीर सिंह रोडे की हार्ट अटैक से मौत हुई है। लखबीर सिंह रोडे का परिवार कनाडा में रहता है और जल्द ही परिवार के सदस्य कनाडा से पंजाब आएंगे और 13 दिसंबर को श्री अकाल तख्त साहिब पर अरदास की जाएगी। 16 दिसंबर को मोगा के गांव रोडे में जरनैल सिंह भिंडरांवाले के जन्म स्थान पर बने गुरुद्वारा में अंतिम अरदास की जाएगी।