मनीमाजरा में पिछले महीने लावारिस कुत्ते का शिकार बने 16 लोगों में से एक पांच साल की बच्ची सादिया की रैबिज से मौत हो गई। बुधवार को उसे इलाज के लिए पीजीआई के एडवांस पीडिएट्रिक सेंटर (एपीसी) में भर्ती कराया गया था, जहां देर रात उसने दम तोड़ दिया।
इस बीच डॉक्टरों ने मनीमाजरा के उन सभी लोगों की फिर से जांच के लिए कहा, जिन्हें स्ट्रे डॉग ने काटा था। गत 25 मार्च को कुत्ते ने उसके होठ और कान काट कर अलग कर दिए थे। उसके बाद सादिया को गंभीर हालत में पीजीआई में भर्ती कराया गया था।
चंडीगढ़ में सीरम न मिलने पर अंबाला से मंगवाकर वेक्सीन दिया गया था। पीजीआई ने स्वस्थ बताकर उसे 8 अप्रैल को छुट्टी दे दी थी। जिस कुत्ते ने 16 लोगों को काटा था, उसमें भी रैबिज की पुष्टि हुई थी।
पहले भर्ती करने से इंकार किया
सादिया के मामा जिसान के अनुसार मंगलवार को तबीयत बिगड़ गई और बुखार होने पर स्थानीय डिस्पेंसरी में भी दिखाया गया था। बुधवार सुबह उसके मुंह और नाक से झाग निकलने लगे, उलटी और दस्त हो गए।
बच्ची को सबसे पहले पीजीआई के ट्रामा सेंटर लाया गया, जहां से उसे एपीसी रेफर कर दिया गया। मगर वहां स्टाफ ने बच्ची का इलाज करने से इंकार कर दिया और कहा कि बच्ची को रैबिज है इसे वापस घर ले जाएं।
इस पर परिजनों ने इसकी जानकारी फोन पर मेयर को दी और मेयर मौके पर पहुंची जिसके बाद पीजीआई इलाज करने के लिए तैयार हुआ। इसके बाद जांच रिपोर्ट के बाद एपीसी के डॉक्टरों ने रैबिज की पुष्टि कर दी।
मेयर पूनम शर्मा पहुंचीं मौके पर
सूचना मिलने पर मेयर पूनम शर्मा और एमओएच विंग के डाक्टर एमएस कंबोज भी पीजीआई में पहुंचे। सादिया की दर्दनाक हालत देखकर मेयर पूनम शर्मा सकते में आ गईं। मेयर पूनम शर्मा के अनुसार प्रतिदिन 15 से 20 कुत्तों की नसबंदी हो रही है। कुछ डॉग लवर एनजीओ इसका विरोध कर रहे हैं। कुत्तों को पट्टा डालने और रंग लगाने का विरोध किया जा रही हैं।
उसने पूछा था, क्या मैं पहले जैसी हो जाऊंगी
सादिया को पिछले हफ्ते जब पीजीआई से छुट्टी मिली तो उसने अपनी मां से पूछ था कि क्या में पहले जैसी हो जाऊंगी। उसके इस सवाल से मां की आंखें भर आई थीं। बुधवार को भी वह इस बात को याद कर विलाप कर रही थीं।
सभी 16 लोगों की होगी जांच
सादिया में रैबिज की पुष्टि होने के बाद डॉक्टरों ने उन सभी 16 लोगों की जांच फिर से कराने को कहा है, जिन्हें 25 मार्च को उस कुत्ते ने काटा था। कुत्ते की मौत भी 26 मार्च को हो गई थी। कसौली की प्रयोगशाला में कुत्ते में रैबिज की पुष्टि हुई थी।
ह्यूमन सिरम भी रखने का निर्णय
सादिया को काटने के बाद नगर निगम की पिछली सदन की बैठक में ह्यूमन सिरम भी सेक्टर-19 और 38 की डिस्पेंसरी में रखने का निर्णय लिया था। गत 25 मार्च को सादिया को ह्यूमन सिरम लगना था और शहर में यह सिरम नहीं मिला था। यह सिरम अंबाला से मंगवाना पड़ा था।
दो साल में 13280 डॉग बाइट केस
पिछले दो साल में 13280 लोगों को कुत्ते काट चुके हैं। ये वे लोग हैं, जिन्हें नगर निगम की ओर से वैक्सीन दी गई है। ऐसे में हर माह 600 से ज्यादा लोगों को कुत्तें काट रहे हैं। प्रतिदिन औसत 20 लोगों को कुत्तें घायल कर रहे हैं।
12 बच्चों को काटा था
25 मार्च को मनीमाजरा में आवारा कुत्ते ने 16 लोगों को काटा था, उनमें 12 मासूम बच्चे थे। सादिया की स्थिति गंभीर होने के कारण उसका 8 अप्रैल तक पीजीआई में इलाज चलता रहा। बच्ची को पहला इंजेक्शन 25 मार्च, दूसरा 1 अप्रैल तीसरा 8 अप्रैल को लगा था। उसके बाद पीजीआई ने छुट्टी दे दी थी। अगला इंजेक्शन 22 अप्रैल को लगना था।
यहां पर आएं इलाज के लिए
नगर निगम ने रैबीज से निपटने के लिए सेक्टर 19 और 38 के डिस्पेंसरी में एक एंटी रैबीज क्लीनिक बनाया है। यहां 50 से 100 रुपये के मूल्य पर वैक्सीन के इंजेक्शन लगाए जाते हैं। बाजार में ये वैक्सीन एक हजार रुपये में मिलते हैं। अगर जख्म गहरा है तो हम्यून सीरम लगाए जाते हैं।
सादिया को जब कुत्ते ने काटा था, तो हम्यून सीरम शहर मे नहीं मिला। जिस कारण अंबाला से मंगाया गया। इस घटना के बाद ही सेक्टर-16 और 32 के अस्पताल में भी कुत्तों के काटने पर वैक्सीन मिल रहा है। ऐसे में शनिवार और रविवार को छुट्टी होने पर लोग यहां पर आकर इलाज करा रहे हैं।
बच्ची की हालत काफी नाजुक है। शहरवासी उसके लिए भगवान से दुआ करें। एनजीओ बच्ची की मदद के लिए आगे आएं।
-पूनम शर्मा, मेयर, चंडीगढ़