चंडीगढ़। शहर के 52 फाउंटेन के संचालन और रखरखाव का खर्च निजी कंपनियों से निकलवाने की नगर निगम की योजना पांच बार टेंडर लगाने के बाद भी सिरे नहीं चढ़ सकी। विज्ञापन लगाने के बदले फाउंटेन की सुरक्षा, सफाई, संचालन और मेंटेनेंस की जिम्मेदारी निजी एजेंसियों को देने का मॉडल बनाया गया था लेकिन एक भी कंपनी आगे नहीं आई। अब निगम खुद ही इन्हें आउटसोर्स स्टाफ के जरिये चला रहा है।
हॉर्टिकल्चर विंग ने फाउंटेन के विज्ञापन और रखरखाव की स्पेसिफिकेशन तैयार कर आवंटन की प्रक्रिया के लिए नवंबर 2025 में मामला विज्ञापन शाखा को सौंपा था। करीब 10 महीने बाद भी स्पेसिफिकेशन तैयार नहीं हो सकी। इसके चलते योजना आगे नहीं बढ़ पाई और फाउंटेन के संचालन का खर्च निगम को ही उठाना पड़ रहा है।
कंपनियां बड़े पार्कों में ही विज्ञापन को तैयार
निगम के मुताबिक कंपनियों का कहना है कि छोटे पार्कों और सब-सेक्टरों में लगे फाउंटेन पर विज्ञापन से पर्याप्त आय नहीं होगी, जबकि संचालन और रखरखाव का खर्च ज्यादा है। कंपनियां बड़े पार्कों और गार्डन में लगे फाउंटेन के लिए तैयार हैं, लेकिन निगम ने इन्हें अलग जोन में नहीं बांटा है। 52 फाउंटेन चलाने के लिए आउटसोर्स स्टाफ पर करीब 1.43 लाख रुपये प्रतिमाह खर्च हो रहे हैं। सफाई और रखरखाव का खर्च इसके अलावा है। चीफ इंजीनियर संजय अरोड़ा ने कहा कि निजी एजेंसी नहीं मिलने तक निगम फाउंटेन को आउटसोर्स स्टाफ से चलाता रहेगा। फाउंटेन बंद रखने से वे खराब होंगे और लोगों को इनका लाभ नहीं मिल पाएगा।