बिहार की तर्ज पर हरियाणा में शराब पर बैन क्यों नहीं लगाया जा रहा, इस सवाल पर मुख्यमंत्री के अपने तर्क हैं। सीएम खट्टर ने अंतरराष्ट्रीय नशा निवारण दिवस पर जीजेयू के ऑडिटोरियम में युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि जब से सरकार बनी हैं सरकार के पास शराब बंदी को लेकर सुझाव आ रहे हैं। विशेषकर महिलाओं की तो मांग है कि नशे पर पूरी तरह रोक लगा दी जाए। क्योंकि उन्हें घर ओर रसोई चलानी होती है। नशा करने वालों के घर-रसोई का खर्च चलाना भी महिलाओं के लिए मुश्किल हो जाता है।
खट्टर ने कहा कि ऐसा वर्ष 1996 में हमारी सहयोगी सरकार के समय हुआ। लोगों ने खूब सहयोग किया मगर यहां शराब का अवैध कारोबार शुरू हो गया। राजस्थान, पंजाब दिल्ली के बॉर्डर से शराब की खूब तस्करी होने लगी। हमारे ही युवा इस तस्करी से जुड़ गए।
खट्टर ने कहा कि इसीलिए हम ये नहीं चाहते क्योंकि कई बार कानून के काम करने से रिएक्शन गलत हो जाता है। शराब का अवैध कारोबार का खतरा बढ़ जाता है, जिसके कारण स्मगलिंग शुरू हो जाती है। इसी कारण तत्कालीन सरकार को शराब बंदी हटानी पड़ी। उन्होंने कहा कि लोगों का सुझाव अच्छा है। मगर कई बार इस तरह की चीजें कानून से नहीं बल्कि संस्कार व जनजागरण से रुकती हैं।
जरूरी दवाइयों को छोड़कर बैन होगी नशे की दवाइयां
खट्टर ने कहा कि जरूरी दवाइयों को छोड़कर बाकी नशे की दवाइयां बैन की जाएंगी। उन्होंने कहा कि हमें भी नशे की दवाइयों के बारे में शिकायत मिल रही है, मगर इनमें कई ऐसी दवाइयां हैं जो बीमारी के लिए यूज की जाती हैं।