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पंजाबः अफसर ही दबा गए कैंसर सेस और कल्चर सेस का पैसा, हुई कड़ी कार्रवाई की सिफारिश

Fri, 13 Mar 2020 11:17 AM IST
खुशबू गोयल हर्ष कुमार सलारिया, चंडीगढ़
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प्रतीकात्मक फोटो
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सरकारी विभागों का कामकाज कितनी लापरवाही से चल रहा है, उसका एक बड़ा उदाहरण पंजाब विधानसभा की शहरी स्थानीय संस्थाओं संबंधी तकनीकी निरीक्षण कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में पेश किया है। इस विभाग के अधिकारी विभिन्न करों व उपकरों की उगाही और रिकवरी में दिलचस्पी नहीं ले रहे। अनेक मामलों में करोड़ों की राशि की रिकवरी नहीं की गई और कुछ मामलों में उगाही गई राशि को किसी अन्य मद में खर्च कर दिया गया।
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कमेटी ने इस विभाग की कारगुजारी पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए न सिर्फ बकाया राशि की वसूली तेज करने की सिफारिश की है बल्कि लापरवाह अधिकारियों पर एक्शन लेने को भी कहा है। पंजाब विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सदन में पेश की गई उक्त कमेटी की रिपोर्ट में, मकान निर्माण व शहरी विकास विभाग पर उंगली उठाते हुए कहा है कि राज्य सरकार ने अगस्त 2013 में तय किया था कि अनाधिकृत कालोनियों/प्लाटों को रेगुलर करने के एवज में मिलने वाली कुल फीस में से कैंसर सेस और कल्चर सेस के रूप में 1-1 फीसदी राशि खजाने में जमा कराई जाएगी।

लेकिन कमेटी ने जांच में पाया कि 31 शहरी स्थानीय संस्थाओं ने 2013-16 के दौरान रेगुलराइजेशन चार्ज के रूप में 66.42 करोड़ रुपये हासिल किए, लेकिन दोनों सेस की बनती 1.33 करोड़ की राशि खजाने में जमा नहीं कराई। कमेटी ने इसे गंभीर लापरवाही करार देते हुए 31 मई 2020 तक सेस की सारी राशि खजाने में जमा कराने और दोषी अफसरों पर विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की है।
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गो-सेस की राशि से बांट दिया वेतन

लोकल बॉडी विभाग ने सभी शहरी स्थानीय संस्थाओं को गो-सेस लागू करने के निर्देश दिए थे लेकिन कमेटी ने पाया कि 42 शहरी स्थानीय संस्थाओं में से 41 ने गो-सेस का नोटिफिकेशन ही जारी नहीं किया। सिर्फ बठिंडा नगर निगम ने इसे लागू किया लेकिन गो-सेस में मिले 2.76 करोड़ में से 1.94 करोड़ ही गायों की संभाल पर खर्च किए।

इसके बाद पटियाला एमसी ने तो गो-सेस में हासिल हुए 1.3 करोड़ का राशि में से 0.97 करोड़ रुपये अपने कर्मचारियों का वेतन देने में खर्च कर दिए। कमेटी की जांच में डायरेक्टोरेट चार्जेज और अनाधिकृत कालोनियों से एकत्र की गई राशि को विकास कार्यों की बजाय कर्मचारियों के वेतन, रिटायरमेंट लाभ, दफ्तरों के बिजली के बिल आदि के भुगतान पर खर्च कर दी गई।

लेबर सेस का पैसा दबा गया विभाग
नियम के अनुसार, श्रम विभाग को किसी भी इमारत की योजना को मंजूरी देते हुए उसके निर्माण की अनुमानित लागत की एक फीसदी राशि और ठेकेदार के बिलों में से टेंडर नोटिफिकेशन के जरिए मंजूर लागत पर एक फीसदी राशि काटकर लेबर सेस के तौर पर पंजाब निर्माण मजदूर कल्याण बोर्ड के पास जमा करानी है।

लेकिन कमेटी ने जांच में पाया कि 2013 में उगाही गई राशि 2016 तक बोर्ड के खाते में जमा नहीं कराई गई। विभाग ने कमेटी को बताया कि लेबर सेस की कुल 476.70 लाख रुपये की राशि में से 177.76 लाख रुपये ही बोर्ड के खाते में जमा कराए गए हैं। कमेटी ने 31 मई 2020 तक सारा बकाया पैसा देने और लापरवाह अफसरों पर विभागीय कार्यवाही की सिफारिश की है।
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संपत्ति कर का 2 फीसदी भाग भी नहीं दिया

राज्य सरकार की ओर से मई 2014 में यह भी तय किया गया था कि शहरी स्थानीय संस्थाओं के अधिकार क्षेत्र से एकत्र होने वाले संपत्ति कर की 2 फीसदी राशि पंजाब राज्य कैंसर व ड्रग एडीक्शन इलाज बुनियादी ढांचा फंड में जमा कराया जाएगा। इस मामले में कमेटी ने पाया कि 42 शहरी स्थानीय संस्थाओं ने 309.45 करोड़ का संपत्ति कर एकत्र किया, लेकिन 2 फीसदी के हिसाब से बनती 6.19 करोड़ की राशि में से केवल 1.28 करोड़ ही जमा करवाए।

हालांकि संबंधित विभाग ने कमेटी को बताया कि 2013-14 से 2015-16 तक 496.15 लाख रुपये में से 160.35 लाख रुपये की रिकवरी करके संबंधित खाते में जमा करा दिए गए हैं लेकिन विभाग इस अदायगी के कोई दस्तावेज पेश नहीं कर सका। कमेटी ने अब विभाग को मई, 2020 तक की मोहलत दी है।
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