चंडीगढ़। पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी (पेक) ने उन सभी शिक्षकों के बेहतर करिअर के बारे में सोचा है जिन्होंने अब तक पीएचडी नहीं की। उन्हें मौका दिया जा रहा है कि वह पीएचडी करें ताकि उन्हें भविष्य में प्रमोशन का लाभ मिल सके। साथ ही पीएचडी की डिग्री से ही वह अपने ज्ञान को और निखार सकते हैं।
पेक में शिक्षकों की संख्या लगभग 100 है। इसमें से 20 से अधिक शिक्षक ऐसे हैं जो केवल एमटेक यानी मास्टर डिग्री के आधार पर ही स्थायी नौकरी पर लगे हैं। हालांकि उस समय पीएचडी अनिवार्य नहीं थी। अब पेक ने नई भर्तियों के लिए पीएचडी की योग्यता को अनिवार्य कर दिया है। यह इसलिए किया गया है कि शिक्षा गुणवत्ता में और बेहतर सुधार हो सके। इसी के साथ पेक अपने कार्य कर रहे शिक्षकों के ज्ञान को भी और सुदृढ़ करना चाहता है। इसी को देखते हुए बिना पीएचडी वाले शिक्षकों को पीएचडी करने की सलाह दी है। कहा है कि पीएचडी करेंगे तो प्रमोशन से लेकर कई चीजों का लाभ उठा पाएंगे।
पीयू से पेक को मिला यह संदेश
पीयू में स्थायी शिक्षकों की भर्ती के लिए पीएचडी अनिवार्य है, लेकिन यह व्यवस्था पीयू में भी कई साल पहले नहीं थी। मास्टर डिग्री व अन्य परीक्षाओं के आधार पर शिक्षकों की भर्तियां की गईं, लेकिन जब बारी प्रमोशन आदि की आई तो उन्हें यह लाभ नहीं मिला। इसी को देखते हुए पीयू ने इन शिक्षकों को पीएचडी करने की सलाह दी। 30 से अधिक शिक्षकों ने पीएचडी पूरी कर ली और वह असिस्टेंट से एसोसिएट प्रोफेसर बन गए। साथ ही शिक्षा गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है। पेक ने भी यही तरीका निकाला है। यदि सभी शिक्षक पेक में पीएचडी वाले हो जाएंगे तो संस्थान की शैक्षिक गुणवत्ता और मजबूत होगी। इस कार्य पर तेजी से पेक प्रशासन कार्य कर रहा है।
एनआईटी बनने से पहले शिक्षकों को पीएचडी होना जरूरी
यदि पेक एनआईटी बनने में सफल होता है तो सुविधाएं आदि उसी हिसाब से दी जाएंगी। पैसे की किल्लत नहीं होगी, लेकिन पेक को अपना शैक्षिक स्तर पर सबसे ऊपर रखना होगा। इसमें वही शिक्षक बेहतर कार्य कर पाएंगे जो रिसर्च आदि से जुड़ेंगे या जुड़ चुके हैं क्योंकि कई मानक भी एनआईटी बनने के बाद बदलेंगे। इससे पहले पेक ने सभी शिक्षकों को पीएचडी के लिए मौका दिया है।
क्या कहते हैं अधिकारी
वह शिक्षक जिन्होंने पीएचडी नहीं की है, वह कर सकते हैं। इससे उनके करिअर में और निखार आएगा। साथ ही वह विद्यार्थियों को और बेहतर जानकारी दे पाएंगे।
- प्रो. धीरज सांघी, निदेशक, पेक