चंडीगढ़। चंडीगढ़ कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (सीसीईटी) कॉलेज नाम तो रख दिया गया, लेकिन नींव माने जाने वाले डिप्लोमा विंग को अलग-थलग कर दिया गया। सर्वाधिक नुकसान इसी विंग को हो रहा है। यहां के शिक्षकों को न तो सातवें वेतनमान का लाभ मिला और न अन्य कुछ लाभ, जबकि डिग्री विंग के शिक्षक इस लाभ के हकदार हो गए। कुछ शिक्षकों का कहना है कि यूटी प्रशासन ने संस्थान को अपग्रेड करने के चक्कर में सभी का नुकसान कर दिया। अभी भी समय है कि चंडीगढ़ प्रशासन अपने इकलौते इस इंजीनियरिंग कॉलेज को काफी आगे ले जा सकता है, इसका हल निकालना होगा।
डिप्लोमा विंग के पास अनुभवी शिक्षक हैं। 15 शिक्षक ऐसे हैं जिन्होंने पीएचडी की है। कठिन से कठिन परीक्षाएं उत्तीर्ण कर ये शिक्षक यहां पहुंचे हैं, लेकिन उनकी योग्यता का लाभ डिग्री विंग के विद्यार्थी नहीं ले पा रहे हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि शिक्षकों को वहां पढ़ाने की कोई अनुमति नहीं है और न ही विद्यार्थी डिग्री विंग में जाकर कुछ नई चीज जान पाते। विद्यार्थियों ने कहा है कि डिग्री विंग में ट्रेडों की संख्या बढ़ाएं ताकि अन्य विद्यार्थियों को लाभ मिल सके और दोनों संस्थानों को जिस तरह एक कॉलेज का नाम दिया गया है उसी तरह इसका संचालन भी एक हो। इससे विद्यार्थियों को और लाभ मिलेगा।