कोरोना महामारी के चलते 83 दिन बाद सोमवार को शिक्षक स्कूलों में पहुंचे। पहले दिन शिक्षकों ने पेंडिंग कार्य निपटाए। साथ ही छात्रों की समस्याओं का ऑनलाइन निस्तारण करने को प्लान बनाया। बोर्ड परीक्षा की तैयारियां भी शुरू कीं। छात्रों को कॉल के जरिये कई जानकारियां भी दी गईं। वहीं ऑनलाइन पढ़ाने की प्लानिंग पर भी काम किया।
यह शिक्षक रोटेशन प्रणाली के तहत स्कूलों में पहुंचे थे। स्कूलों में पहुंचने वाले शिक्षकों का सबसे गेट पर थर्मल स्क्रीनिंग के जरिये तापमान देखा गया और इसके बाद हैंड सैनिटाइज करवाए गए। सभी शिक्षकों ने मास्क लगाकर स्कूलों में एंट्री की। स्कूल पहुंचने पर शिक्षकों ने सोशल डिस्टेंसिंग के साथ कार्य किया। लेकिन आज उन्हें अलग अनुभव हो रहा था, क्योंकि छात्रों का शोर उन्हें नहीं सुनाई दे रहा था। लॉकडाउन के कारण स्टूडेंट्स अपने घरों पर हैं।
कुछ शिक्षकों का कहना है कि विद्यार्थियों के बिना स्कूल सुनसान हैं। शिक्षकों ने कक्षाओं का दौरा भी किया। उसके बाद पुराने रजिस्टर के तहत कार्य निपटाए और नए कार्यों के लिए डेटा तैयार किया। बताया जाता है कि शिक्षकों को स्कूल बुलाने के पीछे का मकसद पीसा परीक्षा है। इसके लिए ऑनलाइन असाइनमेंट दिए जाएंगे। विद्यार्थियों को शिक्षकों ने फोन करके कई विषयों की जानकारियां भी दीं।