नगर निगम अब अपना राजस्व बढ़ाने के लिए लोगों पर टैक्स का बोझ डालेगा। चौथे दिल्ली फाइनेंस कमीशन की ओर से यूटी के प्रशासक शिवराज पाटिल को सौंपी गई रिपोर्ट में स्पष्ट किया है नगर निगम को न सिर्फ टैक्स कैलकुलेट करने के तरीके बदलने होंगे बल्कि लोगों पर नए तरह के टैक्स भी लगाने होंगे।
कमीशन ने अपनी रिपोर्ट में शहर के लोगों से कंजेशन टैक्स वसूलने को कहा है। साथ ही कुछ बड़े शहरों की तरह लोगों से चंडीगढ़ में प्रैक्टिस करने वाले वकीलों से प्रोफेशनल टैक्स भी लेने को कहा है। कमीशन ने नगर निगम से शहर में पानी का रेट भी बढ़ाने को कहा है।
अगर दिल्ली फाइनेंस कमीशन के इस प्रस्ताव को नगर निगम लागू कर देता है तो शहर के लोगों को न सिर्फ अपने घर पर वाहन रखने के लिए टैक्स देना होगा बल्कि शहर के कुछ हिस्सों में वाहनों की पार्किंग के लिए भी कंजेशन टैक्स देना होगा।
अगर प्रोफेशनल टैक्स लगता है को शहर में प्रैक्टिस करने वाले वकीलों, सीए, डॉक्टरों और अन्य व्यवसायियों को टैक्स देना पड़ेगा। ऐसे में शहर के लोगों पर टैक्स का दोहरा बोझ पड़ेगा।
कंजेशन टैक्स के रूप में होगा लागू
नगर निगम कंजेशन टैक्स लगाने के प्रस्ताव को नवंबर, 2010 में रद्द कर चुका है। लगभग साढ़े तीन साल पहले नगर निगम ने सेक्टर-17, 22, 26 और 35 की बाजारों में कंजेशन टैक्स लगाने का प्रस्ताव बनाया था। सदन ने यह प्रस्ताव रद्द करते हुए प्रशासन से बाजारों में पार्किंग की व्यवस्था करने को कहा था।
इसके बाद केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने यूटी प्रशासन से नगर निगम को कंजेशन टैक्स लगाने को कहा था। प्रशासन ने केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय से निर्देश मिलने के बाद नगर निगम को कंजेशन टैक्स का प्रारूप तैयार करने को कहा था, लेकिन नगर निगम ने इसके बाद कुछ नहीं किया।
ध्यान रहे कि कंजेशन टैक्स एक तरह की फीस जो कि वाहन पार्क करने के लिए देनी होगी। शहर के व्यस्त बाजारों में इसे लागू किया जाना है। अगर यह लागू हो जाता है तो लोगों को बाजारों में अपने वाहन पार्क करने के लिए पार्किंग फीस के साथ साथ एक और फीस भी देनी होगी।
नगर निगम के ग्रांट में की जाए बढ़ोतरी
दिल्ली फाइनेंस कमीशन ने अपनी रिपोर्ट में यूटी प्रशासन को नगर निगम को ज्यादा ग्रांट देने की भी सिफारिश की है। अपनी रिपोर्ट में कमीशन ने स्पष्ट किया है कि प्रशासन नगर निगम को जो ग्रांट देता है उसमें 175 फीसदी तक बढ़ोतरी की जाए।
इसके अलावा प्रशासन का नगर निगम पर जो बकाया है वह भी उसे दिया जाए। कमीशन का मानना है कि नगर निगम के पास विभाग बढ़े हैं और खर्चा भी बढ़ा है। इसलिए वैट से वसूल होने वाली फीसदी राशि नगर निगम को दी जाए।
प्रशासन को अन्य करों से होने वाली आय का हिस्सा भी नगर निगम को देना चाहिए। इसके साथ ही वाहनों के रजिस्ट्रेशन से होने वाली आय का हिस्सा भी नगर निगम को ही दिया जाए।