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नोटबंदी से कम हुआ है टैक्स कलेक्शन, वित्तीय घाटा बढ़ा

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चंडीगढ़। नोटबंदी को तीन साल हो चुके हैं लेकिन अर्थव्यवस्था पर लगी प्रारंभिक चोट का घाव अभी तक नहीं भर पाया है। नोटबंदी के बाद से जीडीपी की ग्रोथ रेट कम होती गई। यह कहना है अर्थशास्त्री एवं आरबीआई के चेयर प्रोफेसर डॉ. सतीश वर्मा ने कही। उन्होंने कहा, अर्थव्यवस्था वर्ष 2014-15 में दौड़ रही थी। ग्रोथ रेट आठ फीसदी से अधिक था लेकिन आज इसमें गिरावट आ रही है। हालांकि चार फीसदी मुद्रा स्फीति के चलते प्राइस कंट्रोल हो रहा है पर वित्तीय घाटा बढ़ रहा है।
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अर्थशास्त्री डॉ. सतीश वर्मा ने बताया कि वर्ष 2014-15 में अर्थव्यवस्था की ग्रोथ रेट ठीक थी लेकिन उसके बाद कम हुई। रोजगार, जीडीपी, टैक्स कलेक्शन लगातार कम होता गया। जीएसटी भी कुछ कारण बना है। पांच फीसदी टैक्स कलेक्शन इस बार कम हुआ। सरकार के पास पैसा नहीं बचा। इसके कारण आरबीआई से 1.76 लाख करोड़ रुपये लेना पड़ा। दूसरी बार भी 72 हजार करोड़ रुपये लिए। उन्होंने बताया कि प्राइवेट इन्वेस्टमेंट कम हुआ। इसके कारण सरकार को वित्तीय घाटा बढ़ाना पड़ रहा है। कहा, तीन साल में जीडीपी की ग्रोथ रेट पटरी पर नहीं आ पाई। बेरोजगारी भी इसी कारण बढ़ी है। उन्होंने बताया कि आंकड़े बता रहे हैं कि एमएसएमई, एग्रीकल्चर में कोई बड़ा काम नहीं हो पाया। मैन्युफैक्चरिंग नीचे आ रही है। एक्सपोर्ट भी आगे नहीं बढ़ पा रहा है। अर्थशास्त्री डॉ. सतीश वर्मा कहते हैं कि नोटबंदी से परोक्ष व अपरोक्ष रूप से कई चीजें प्रभावित हुई हैं। कुछ में सुधार भी दिख रहा है लेकिन इसकी भरपाई देर से हो पाएगी।
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