टाटा कैमलॉट प्रोजेक्ट पर दिल्ली हाईकोर्ट ने पंजाब को केंद्र सरकार से एनवायरमेंट क्लीयरेंस लेने को कहा है। आईएफएस संतोष कुमार ने बताया कि दिल्ली हाईकोर्ट ने नया गांव नगर पंचायत द्वारा 5 जुलाई 2013 को प्रोजेक्ट को दी इन्वायरमेंट क्लीयरेंस रद्द कर दी है।
कई सालों से टाटा हाउसिंग बोर्ड डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड का हाउसिंग प्रोजेक्ट टाटा कैमलॉट विवादों में चल रहा था। सुखना कैचमेंट एरिया में आने के कारण चंडीगढ़ प्रशासन ने इस प्रोजेक्ट पर रोक लगा दी थी। टाटा कैमलॉट प्रोजेक्ट के तहत करीब 1,275 करोड़ रुपये में 52.66 एकड़ जमीन पर हाउसिंग प्रोजेक्ट तैयार होना था।
चंडीगढ़ प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि अगस्त 2013 मेें पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इस प्रोजेक्ट के निर्माण पर लगी रोक हटा दी थी। तत्कालीन चीफ जस्टिस संजय किशन कौल एवं जस्टिस एजी मसीह पर आधारित खंडपीठ ने कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट संजीव सूरी द्वारा हाईकोर्ट में प्रोजेक्ट क्लीयरेंस संबंधी एफिडेविट को देखने के बाद प्रोजेक्ट पर लगी रोक हटाने के निर्देश जारी किए थे। इन आदेशों के साथ ही हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि यूटी पेराफेरी पर लगे अन्य निर्माण कार्यों पर रोक जारी रहेगी।
यह हैं 14 मई 2012 के आदेश
अदालत
पंजाब सरकार ने न्यू चंडीगढ़ के मास्टर प्लान में यह प्रोजेक्ट अहम बताया था। उधर, चंडीगढ़ प्रशासन के सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल और एमिकस क्यूरी अपने स्टैंड पर पूरी तरह अडिग थी। इस प्रोजेक्ट से चंडीगढ़ के सौंदर्यीकरण में भारी असर पड़ेगा बल्कि सुखना झील को जाने वाले पानी के चैनल भी पूरी तरह प्रभावित होंगे। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद टाटा कैमलॉट प्रोजेक्ट के निर्माण पर लगी रोक हटाने के निर्देश जारी कर दिए थे। जिसे एपेक्स कोर्ट में चैलेंज किया गया था। इस पर दिल्ली हाईकोर्ट को इस मामले की सुनवाई के लिए कहा गया था।
यह हैं 14 मई 2012 के आदेश
पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई एवं जस्टिस एजी मसीह पर आधारित खंडपीठ ने आदेश जारी किए थे कि सुखना के कैचमेंट इलाके में किसी भी प्रकार की हाउसिंग कॉलोनी या भवन निर्माण नहीं होगा। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया था कि पंजाब और हरियाणा की वन भूमि और कृषि भूमि में प्रतिबंध कड़ाई से लागू रहेगा। हाईकोर्ट ने कैचमेंट एरिया को लेकर सर्वे ऑफ इंडिया के आदेशों को जारी रखने के निर्देश जारी किए थे। इसके बाद तत्कालीन जस्टिस एमएम कुमार एवं जस्टिस अलोक कुमार पर आधारित खंडपीठ ने 14 मई 2012 को पूर्व के आदेशों को लागू रखते हुए निर्माण कार्यों पर पूरी तरह रोक लगा दी थी।
टाटा कैमलॉट में पंजाब व हरियाणा के कई दिग्गज नेताओं का लगा था पैसा
प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक टाटा कैमलॉट प्रोजेक्ट में पंजाब व हरियाणा के कई दिग्गज नेताओं का पैसा लगा था, जिसके चलते समय-समय पर इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी दिए जाने को लेकर राजनीतिक दबाव बनाया जाता रहा। कई पूर्व सांसद, एमएलए और आईएएस अधिकारियों को इस प्रोजेक्ट को पास करवाए जाने को लेकर फ्री में फ्लैट भी देने के वायदे किए गए थे।