स्थानीय निकाय विभाग अब वाटर मीटर पॉलिसी नगर निगम चुनाव के बाद लागू करेगा। अकाली-भाजपा सरकार ने अप्रैल-2017 से यह पॉलिसी लागू करने की योजना बनाई थी, लेकिन स्थानीय निकाय मंत्री नवजोत सिद्धू ने इस पर ब्रेक लगा दी है। जानकारी के मुताबिक पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पानी की बर्बादी और गिरते जलस्तर को रोकने केलिए पंजाब सरकार को वाटर मीटर पॉलिसी बना कर लागू करने केआदेश दिए थे, जिसके बाद अकाली-भाजपा सरकार ने नीति बना ली।
इस दौरान पानी-सीवरेज के बिल बिजली केबिल केसाथ वसूलने की नीति भी बनी, जो विवादों में घिर गई। उसके चलते वाटर मीटर पॉलिसी नहीं लागू हो सकी थी, पर सरकार ने मार्च-2017 तक सभी जगह पानी के मीटर लगा कर अप्रैल-2017 यह पॉलिसी लागू करने की योजना बनाई थी,
जिसके मुताबिक पानी की खपत के मुताबिक ही लोगों से बिल लिया जाना था। इसके बाद चुनाव आचार संहिता लागू हो गई। जालंधर नगर निगम ने जहां कई घरों में दबाव डाल कर पानी के मीटर लगवा दिए तो लुधियाना नगर निगम ने पॉलिसी के संबंध में प्रस्ताव ही पास नहीं किया।
इस बीच सरकार बदल गई और मीटर लगवाने का काम बिल्कुल रुक गया। अब निकाय मंत्री नवजोत सिद्धू ने इसे फिलहाल टालने का फैसला किया है। जानकारी के मुताबिक पंजाब के चार बड़े शहरों लुधियाना, अमृतसर, जालंधर और पटियाला के निगमों का कार्यकाल जून में पूरा हो रहा है।
राज्य की सत्ता पर काबिज होने के बाद कांग्रेस अब निगमों पर भी अपना कब्जा चाहती है। ऐसे में चुनाव से पहले ऐसा कोई फैसला लागू करके वोटरों को नाराज नहीं करना चाहती है। इसलिए सिद्धू ने फिलहाल वाटर मीटर पॉलिसी टालने के निर्देश दिए हैं।