चंडीगढ़। दुनियाभर में अपने द्वारा बनाए गए खानों की रैसपी को लोगों तक पहुंचाता हूं, लेकिन मां के हाथाें बने पकवान आज भी मेरे लिए सबसे अहम हैं। यह कहना है नमक शमक डाल देते हैं, से मशहूर हुए शेफ हरपाल सिंह सोखी का। वे रविवार को लेक क्लब आयोजित चंडीगढ़ लिटराटी फेस्ट-2023 में हिस्सा लेने पहुंचे थे। चंडीगढ़ लिटरारी सोसाइटी की ओर से आयोजित इस फेस्ट में दूसरे दिन सत्रों का आयोजन किया गया। इनमें अमीश, गीतांजलि श्री, शेफ हरपाल सिंह सोखी, अमितोज मान पहुंचे। वक्ताओं के प्रतिष्ठित पैनल ने विचारोत्तेजक संवादों की शुरुआत की, जिसमें उपाख्यानों, कविता और व्यक्तिगत यात्राओं के बीच मानवीय भावनाओं की असंख्य शृंखला को छुआ गया। जैसे-जैसे वे जुड़े, बातचीत की और साहित्यिक शिक्षा का माहौल बनाया। बॉक्स हरपाल सिंह सोखी बोले- 1987 में आईएचएम भुवनेश्वर से कैटरिंग में डिप्लोमा की
शमक से मशहूर शेफ हरपाल सिंह सोखी और नान करी के मेजबान, सदफ हुसैन ने होस्ट राजिंदर कौर के साथ बातचीत की। इस मौके पर सोखी ने बताया कि खाने का शौक शुरू से ही था। इस शौक के चलते 1987 में आईएचएम भुवनेश्वर से कैटरिंग में डिप्लोमा कराया। शुरुआत भुवनेश्वर में एक रसोइए के तौर पर की। 27 साल की उम्र में शेफ बन गए। हरपाल ने बताया कि आज से 30 वर्ष पहले खाने में रोजाना सबकुछ एक साथ होता था, बदलती थी तो वह सिर्फ दाल। लेकिन जैसे जैसे लोगों ने एक जगह से दूसरे जगह आना जाना शुरू किया। हमारे खाने में भी बदलाव आने लगा।
बोले-बदलाव ऐसा कराे कि सेहत खराब न हो
हरपाल ने बताया कि दुनियाभर में खानों की साथ एक्सपेरीमेंट हो रहे हैं। कोई मैगी में साफ्टड्रिंक मिला रहा है तो कोई रसगुल्ले वाली चाय बनाता हुआ दिखाई दे रहा है। पान को स्मोकी पान बना कर बेच रहा है। खाने पीने वाली चीजों के साथ ऐसा एक्सपेरीमेंट करना गलत है। उन्होंने कहा कि जिस दिन लोगों को खाने की समझ आ जाएगी, उसी दिन से वह स्वस्थ रहना शुरू हो जाएंगे। वहीं उन्होंने कहा कि जब भी में कहीं जाता हूं तो लोग नमक शमक वाला शैफ कहकर बुलाते हैं तो काफी खुशी मिलती है।
किताब द बिरयानी लीडर पर डाला प्रकाश
हरपाल सिंह सोखी ने अपनी किताब द बिरयानी लीडर के बारे में बताया कि बिरयानी अपनेआप में एक खास चीज है क्योंकि इसमें कई चीजों को डालकर बनाया जाता है। आप एक अच्छी बिरयानी का स्वाद चखते हैं, न कि इसमें डलने वाली सामग्री के अलग-अलग स्वादों का। किताब की शुरुआत मेरे द्वारा खाना पकाने की कला को दर्शाती हैं। कौन सी साम्रगी कब डालनी है और कैसे मिलाया जाता है।
हिंदी उपन्यास लेखक ममता कालिया और ज्ञान प्रकाश विवेक ने साझा किए अनुभव
हिंदी उपन्यास लेखकों ममता कालिया और ज्ञान प्रकाश विवेक के साथ कहानी और कहानीकार पर सीमा गुप्ता ने बातचीत की। इसमें ‘हिंदी समकालीन उपन्यास’ के विकास की खोज की गई। आदर्शवाद से लेकर शहरी यथार्थवाद तक और समकालीन ‘नई हिंदी’ उपन्यास के ‘नया दौर’ तक जो नए दृष्टिकोणों के साथ प्रयोग कर रहा है। विश्व प्रसिद्ध बेस्ट सेलिंग लेखक अमीश और उनकी बहनें, प्रमुख लेखिका भावना रॉय ने अपनी नवीनतम पुस्तक आइडल्स से लोगों को आकर्षित किया।
गंभीर होकर काम करने से नतीजे मिलते हैं बेहतर
अन्य सत्र में बुक टू बुकर में अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार विजेता, गीतांजलि श्री ने डॉ. गुरमीत सिंह के साथ अपनी भाषा, हिंदी की समृद्ध विरासत और इसकी बहुलता के प्रति अपने लगाव को साझा किया। गीतांजलि ने बताया कि पहली बार चंडीगढ़ आना हुआ है। यह शहर जैसे सुना था कि वैसे ही पाया। उन्होंने अपनी किताब रेत सामधी के बारे में बताया कि इस किताब को लिखने में काफी वक्त लगा। जब लोगों से प्रतिक्रिया मिली कि लगा कि यह हिंदी की बेहतर किताबों में से एक है। वहीं कार्यक्रम के होस्ट डाॅ. गुरमीत ने भी कहा कि जब इस किताब को पढ़ा तो मुझे इसमें लिखी हर लाइन इतनी सुलझी हुई लगी कि मुझे उसे अंडर लाइन करना पड़ा। गीतांजलि श्री ने बताया कि हर एक को अपनी जिंदगी में गंभीर होकर काम करना चाहिए। इससे बेहतर नतीजे मिलते हैं।