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बेमिसालः ढोल की थाप पर विदेशियों को नचा रहे हैं दिलजीत पाल सिंह और पंजाबी भी सिखाते हैं

Wed, 18 Mar 2020 03:52 PM IST
खुशबू गोयल जगदीश जोशी, मुक्तसर
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विधायक दिलजीत पाल सिंह - फोटो : अमर उजाला
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पंजाब के मुक्तसर जिले के छोटे से गांव भंगचड़ी के किसान परिवार से संबंधित दिलजीतपाल सिंह रुबी बराड़ कनाडा की धरती पर पंजाबियत की अलख जगा रहे हैं। लोकप्रियता के चलते वे 11 सितंबर 2019 को विनिपेग के विधायक भी चुने गए हैं। दिलजीतपाल सिंह ने बताया कि विधायक पद का फर्ज तो वे निभाते ही हैं। इसके साथ ही विदेशी धरती पर पंजाब से आने वाले पंजाबी भाइयों को भी सेटल्ड होने, कम्युनिटी से संबंधित समस्याओं को लेकर गाइडलाइन देते रहते हैं।
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जब उन्हें किसी पंजाबी भाई के मुसीबत में होने का पता चलता है तो तुरंत उसकी मदद करते हैं। वे खुद भंगड़े के शौकीन हैं। भंगड़ा पंजाब की शान है। इसलिए उन्होंने विनिपेग में भंगड़ा डांस एकेडमी, बुल्ला आर्ट सेंटर भी खोल रखा है। जहां वे विदेश में बसने वाले पंजाबियों को भंगड़ा सिखाते हैं। वे खुद पीयू में रहते हुए भंगड़ा टीम के कप्तान व कोच रह चुके हैं। वे विनिपेग में विदेश में बसे पंजाबियों के बच्चों को पंजाबी बोलने के टिप्स देते हैं। कला प्रेमियों के लिए समय-समय पर आयोजन करवा पेंटिंग्स मुकाबले करवाते रहते हैं।

पंजाब के सिस्टम से शिकायत
विधायक दिलजीतपाल सिंह ने कहा कि उन्हें पंजाब के सिस्टम से शिकायत है। इसे सुधारना समय की जरूरत है। अगर पंजाब का मौजूदा सिस्टम सही हो जाए तो लोगों को विदेशों की ओर भागने की जरूरत नहीं पड़ेगी। विदेशों का सिस्टम बहुत अच्छा है। वहां हर काम अनुशासन में रहकर होता है। बिना रिश्वत के अफसर अपनी ड्यूटी करते हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब आज बढ़ती जनसंख्या, पर्यावरण प्रदूषण, बेरोजगारी, भ्रष्ट राजनीतिक सिस्टम का शिकार हो गया है। पंजाब में भी सरकार अगर अच्छी शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करवाए और सिस्टम में सुधार करे तो विदेश जाने का चलन कम हो जाएगा।
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2010 में पंजाब से कनाडा गए थे दिलजीतपाल सिंह

दिलजीतपाल सिंह ने गांव में ही छठी तक पढ़ाई करने के बाद दसवीं कक्षा तक सरकारी स्कूल रुपाणा में पढ़े। उसके बाद डीएवी स्कूल चंडीगढ़ से प्लस-टू के बाद वह पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी चले गए। यहां से बीएससी एग्रीकल्चर करने के बाद असिस्टेंट प्रोफेसर की नौकरी भी की। नौकरी के बाद वह गुरदासपुर, फतेहगढ़ साहिब व लुधियाना में रहे। 2010 में वह पंजाब से कनाडा चले गए। वहां शुरुआत में वे सरी में और बाद में विनिपेग के मोनीटोबा में रहने लगे।

बगैर सियासी बैकग्राउंड के लोकप्रियता के दम पर चुनाव जीत बने थे विधायक
दिलजीतपाल सिंह के पिता लेखक मंगल सिंह बराड़ ने कहा कि उनके परिवार का कोई सियासी बैकग्राउंड नहीं है। पिछले दिनों हुए चुनाव में विनिपेग के लोगों ने दिलजीत को चुनाव लड़ने को कहा तो वे चुनाव में खड़े हो गए और वहां उनकी लोकप्रियता के चलते चुनाव जीत भी गए। दिलजीत के भीतर बेहतरीन लेखक भी छिपा है। पीयू की मासिक मैगजीन ‘चंगी खेती’ में सामाजिक मामलों पर उनके लेख अक्सर ही लगते रहे हैं।
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