राज्य पुलिस के बेड़े में बुधवार को 27 नए प्रशिक्षित डॉग्स शामिल
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। प्रदेश की कानून व्यवस्था, वीवीआईपी सुरक्षा और अनसुलझे केसों को सुलझाने की जिम्मेदारी पुलिस के साथ टैंगो, चार्ली और मैक्स के कंधे पर भी होगी। राज्य पुलिस बेड़े में बुधवार को 27 नए प्रशिक्षित डॉग्स को शामिल किए गए हैं। पुलिस इन डॉग्स की मदद से प्रदेश में कानून व्यवस्था और जीरो टॉलरेंस नीति पर कार्य करेगी। वर्तमान में राज्य पुलिस में प्रशिक्षित डॉग्स की संख्या 63 हो गई है। बता दें राज्य पुलिस ने प्रशिक्षित डॉग्स की मदद से 10 माह में 24 केस सॉल्व किए हैं। इस अवधि के दौरान डॉग स्कवॉयड की मदद से 24.450 किग्रा गांजा, 17.18 ग्राम हेरोइन, 42.45 ग्राम स्मैक, 10.572 किग्रा डोडा पोस्त और 62 ग्राम चरस की बरामदगी की गई है।
पुलिस महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने बताया कि वर्तमान में तीन तरह के डॉग्स तैनात हैं। खूबियों के आधार पर इनकी तीन श्रेणियां होती हैं। पहला लैब्राडोर नस्ल के ट्रैकर डॉग्स हैं, जो चोरी, हत्या के केस सुलझाने में पुलिस की मदद करते हैं। ये राज्य अपराध शाखा के पास है। दूसरी प्रकार के डॉग की एक्सप्लोसिव डॉग्स के नाम से पहचान होती है, जो वीआईपी सुरक्षा व संदिग्ध स्थानों पर बम की जांच में इस्तेमाल किए जाते हैं। ये डॉग्स सीआईडी के पास होते हैं। ये भी लैब्राडोर नस्ल के डॉग्स होते हैं। तीसरी प्रकार के नारकोटिक्स डॉग्स होते हैं। ये डॉग्स मादक पदार्थों को जमीन, मकान, बिल्डिंग, वाहन आदि से सूंघ कर पुलिस की मदद करते है। राज्य पुलिस के पास 63 डॉग्स में पांच डॉग्स राज्य नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो और 58 डॉग्स सभी जिलों में तैनात हैं। इन सभी डॉग्स पर एक-एक डॉग हैंडलर व असिस्टेंट डॉग हैंडलर की तैनाती है। राज्य पुलिस के बेड़े में बेल्जियम शेफर्ड, जर्मन शेफर्ड और लैब्राडोर तीन प्रजाति के डॉग शामिल है। इन डॉग्स के खान पान और रखरखाव पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
जानें...प्रशिक्षण और सेवानिवृत्त
नारकोटिक्स डॉग्स को 3 से 6 माह तक की आयु में फर्मों से खरीदा जाता है। इन्हें 6 माह प्रशिक्षित करने के बाद जिलों में तैनात किया जाता है। ये डॉग्स करीब 11 साल में सेवानिवृत्त हो जाते हैं। नियमानुसार सबसे पहले डॉग हैंडलर को अपने साथ घर ले जाने का ऑफर दिया जाता है, उनके मना करने पर किसी एनजीओ या संस्था को सौंपा जाता है।