सरकार और जाट नेताओं के बीच सोमवार को पानीपत रिफाइनरी टाउनशिप में करीब साढ़े तीन घंटे तक तीन चरणों में चली दूसरे दौर की वार्ता भी सिरे नहीं चढ़ी। कयास लगाए जा रहे थे कि अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति और सरकार के बीच सुलह हो जाएगी, लेकिन पांच मांगों पर अब भी पेच फंसा है।
पिछले आरक्षण आंदोलन के दौरान हुए दंगों के आरोप में दर्ज केस वापस लेने के लिए चार सदस्यीय कमेटी बनाई गई है, जो चार दिन में फैसला करेगी। अन्य मांगों पर फैसला लेने के लिए समिति ने सरकार को सात दिन का समय दिया है।
इसके बाद फिर से तीसरे दौर की बातचीत की तिथि निर्धारित की जाएगी, तब तक धरने जारी रहेंगे। बातचीत के लिए सभी जिलों से समिति के पांच-पांच प्रतिनिधि पहुंचे थे। वार्ता के किसी नतीजे पर नहीं पहुंचने के साथ ही जाटों ने अब 26 फरवरी को काला दिवस मनाने की तैयारी शुरू कर दी है।