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Chandigarh News: 28 साल बाद फिर मंच पर लौटा ताजमहल का टेंडर

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चंडीगढ़। अक्टूबर 1998 में पहली बार मंचित हुआ ताजमहल का टेंडर नाटक 28 साल बाद भी दर्शकों के बीच अपनी खास पहचान बनाए हुए है। इन वर्षों में इसका देश-विदेश में हजारों बार मंचन हो चुका है। चंडीगढ़ में भी नाटक के कई सफल मंचन किए जा चुके हैं। अब नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा ने इसे एक बार फिर मंच पर पेश किया है। इस बार की प्रस्तुति की खास बात यह रही कि नाटक के कई पुराने कलाकार वर्षों बाद फिर एक साथ मंच पर नजर आए।
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कार्यक्रम का आयोजन चंडीगढ़ के सांस्कृतिक विभाग, चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी और टैगोर थिएटर सोसाइटी के सहयोग से किया गया। नाटक के लेखक अजय शुक्ल हैं। इसका संगीत और निर्देशन चित्तरंजन त्रिपाठी ने किया है। 1998 में जब नाटक पहली बार मंचित किया गया था, तब त्रिपाठी खुद इसके कलाकार थे। इस बार उन्होंने निर्देशन के साथ शाहजहां की भूमिका भी निभाई। नाटक में बृजेश शर्मा, श्रीवर्धन त्रिवेदी और पराग शर्मा ने भी अपनी प्रस्तुति दी।

नाटक में कल्पना की गई है कि अगर आज के समय में शाहजहां ताजमहल बनवाना चाहें तो उन्हें सरकारी दफ्तरों, फाइलों, नियमों और टेंडर की लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा। ऐसे में ताजमहल बनवाने में क्या-क्या परेशानियां आएंगी, यही नाटक का मुख्य विषय है। हंसी-मजाक के जरिए नाटक सरकारी काम में देरी, कागजी कार्रवाई और अधिकारियों के चक्कर पर व्यंग्य करता है। समय के साथ इसमें नए संवाद और आज के दौर से जुड़े प्रसंग भी जोड़े गए हैं। यही वजह है कि करीब 28 साल बाद भी नाटक दर्शकों को पसंद आता है। पुराने कलाकारों की वापसी ने इस मंचन को और खास बना दिया। यह प्रस्तुति जहां पुराने दर्शकों को उनकी रंगमंच की यादों से जोड़ती है, वहीं नई पीढ़ी को भी व्यवस्था पर हंसते-हंसाते सोचने का मौका देती है।
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