गायक मोहम्मद रफी की मौत के साथ ही एक उभरती हुई आवाज भी फिल्मी संगीत से दूर हो गई। 60-70 के दशक में गायिका उषा तिमोथी ने अपनी मधुर आवाज से लोगों के दिलों पर राज करना शुरू कर दिया था, लेकिन उन्होंने अचानक फिल्मों से खुद को दूर कर लिया।
वीरवार को उषा तिमोथी चंडीगढ़ आई हुई थी। वह आज टैगोर थिएटर में होने वाले कार्यक्रम रफी नाइट में प्रस्तुति देंगी।
अमर उजाला से बातचीत में उषा ने बताया कि वह मोहम्मद रफी के बेहद करीब थी। आठ साल की उम्र में ही उन्होंने रफी साहब से संगीत की तालीम लेनी शुरू कर दी थी।
उषा ने कहा कि ‘ रफी साहब की मौत से मुझे बहुत धक्का लगा और उसके बाद मैंने दोबारा किसी फिल्म में गीत नहीं गाया।’
उषा ने बताया कि उनकी आखिरी फिल्म मुकद्दर का सिकंदर थी, जिसमें उन्होंने एक गीत गाया था।
उषा ने बताया कि वह फिल्मों से भले ही दूर रही, लेकिन उन्होंने गायकी का साथ नहीं छोड़ा। पिछले कई सालों से वह स्टेज शो ही कर रही हैं।
13 साल की उम्र में पहला गाना
उषा ने बताया कि उन्होंने 8 साल की उम्र से संगीत सीखना शुरू कर दिया था और फिल्मों में पहली बार उन्हें 13 साल की उम्र में गाने का मौका मिला।
सबसे पहले उन्होंने 1967 में आई फिल्म तकदीर में मोहम्मद रफी के साथ जब-जब बहार आई गीत गाया। इसके बाद उन्होंने रफी, किशोर, मुकेश और मन्ना डे के साथ गीत गाए। उन्होंने रफी के साथ 38 बार विदेशों में भी शो किए थे।
उषा के कुछ चर्चित गीत
जब-जब बहार आई- तकदीर
तू रात खड़ी थी छत पे- हिमालय की गोद में
अब छोड़ दिया तुझ पे- हम राही
ऐ मां तेरी सूरत से अलग- दादी मां
हुआ दिल दिल्ली वाली का- परिवार