भृगुवंशी श्री परशुराम महागाथा ने जीता सबका दिल
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टैगोर थिएटर चंडीगढ़ में आयोजित लाइट एंड साउंड शो भृगुवंशी श्री परशुराम महागाथा ने सभी का दिल जीत लिया। इस लाइट एंड साउंड शो का आयोजन किया संवाद थिएटर ग्रुप ने। नार्दन इंडिया में इस लाइट एंड साउंड शो का आयोजन पहली बार किया गया। मुकेश शर्मा द्वारा निर्देशित इस लाइट एंड साउंड शो में भगवान परशुराम के क्रोधी होने के कारणों को उठाया गया। दो घंटे के इस शो के दौरान टैगोर का हाल पूरी तरह से भरा रहा।
इस लाइट एंड साउंड शो में मुकेश शर्मा ने महल, आश्रम का सेट बेहतरीन ढंग से तैयार किया था। इसमें नदी और पहाड़ को दर्शाने के लिए उन्होंने चटाइयों का प्रयोग कलर्स के साथ किया। इसके साथ ही स्टेज को स्मोकी लुक देने के लिए स्मोक का प्रयोग किया गया। स्टेज में आश्रम के ऊपर कबूतरों को बैठाया गया। जिससे आश्रम का लुक एकदम बेहतरीन दिखाई दिया। नाटक में परशुराम की भूमिका जसप्रीत सिंह ने निभाई जबकि हीरा सिंह ने सहस्त्रबाहु की भूमिका निभाई। रेणुका की भूमिका में मधुबाला और जमदग्नि ऋषि की भूमिका में वरिंदर ने बेहतरीन एक्टिंग की।
यह थी नाटक की कहानी
परशुराम भगवान विष्णु के छठे अवतार कहे जाते हैं। वह त्रेता युग के मुनि थे। उनका जन्म भृगुश्रेष्ठ महर्षि जमदग्नि की ओर से करवाए गए पुत्रेष्टि यज्ञ से प्रसन्न देवराज इन्द्र के वरदान स्वरूप हुआ। इसमें दिखाया गया कि किस तरह से भृगु ऋषि से राजा गाधि अपनी बेटी सत्यवती का विवाह कर देते हैं और उसके बाद संतान प्राप्ति के लिए सत्यवती को विलाप करता देखकर भृगु ऋषि उनको दो चरु पात्र देते हैं लेकिन सत्यवती की मां उनको बदल देती हैं। जैसे ही यह भृगु ऋषि को पता चलता है तो वह कुपित हो जाते हैं और श्राप दे देते हैं। वो जो श्राप दिया है उसको एक पीढ़ी आगे बढ़ा देते हैं। ऐसे में सत्यवती से जमदग्नि का जन्म होता है और उसके बाद जमदग्नि का विवाह प्रसेनजित की कन्या रेणुका से होता है और रेणुका के पांच पुत्र होते हैं, रुक्मवान, सुखेण, वसु, विश्वानस और परशुराम। इसके बाद किस प्रकार से परशुराम भगवान शिव की आराधना से शस्त्र विद्या में निपुण होते हैं और कैसे असुरों को परास्त करते हैं।