ट्राइसिटी में स्वाइन फ्लू का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। शनिवार को पीजीआई की वायरोलॉजी लैब की आई रिपोर्ट के मुताबिक स्वाइन फ्लू के दो पॉजीटिव मरीज मोहाली से आए हैं, जबकि एक कालका से है।
रिपोर्ट के मुताबिक मोहाली का पहला पेशेंट मात्र एक साल का बच्चा है। उसे पीजीआई में एडमिट कराया गया है। दूसरे मरीज की उम्र 52 साल है और वह एक महिला है। तीसरी मरीज कालका की छह वर्षीय बच्ची है।
चंडीगढ़ से किसी भी मरीज के सैंपल पॉजीटिव नहीं आए। शनिवार को चंडीगढ़ के अस्पतालों में 56 मरीजों की जांच की गई। इनमें से नौ संदिग्ध मरीजों के सैंपल पीजीआई भेजे गए हैं।
पंचकूला जनरल अस्पताल में दो संदिग्ध मरीज
सेक्टर
छह स्थित जनरल अस्पताल में शनिवार शाम स्वाइन फ्लू के दो संदिग्ध मरीजों को
दाखिल किया गया। दोनों मरीज पिंजौर के रहने वाले हैं। इनमें एक साढ़े तीन
साल की बच्ची है। बच्ची को तेज बुखार व सांस लेने में दिक्कत थी।
वहीं,
दूसरे मरीज का नाम करमदीन है, जिसकी उम्र 52 साल है। करमदीन के परिजनों ने
उसे तेज बुखार, खांसी व सांस फूलने की शिकायत होने पर जनरल अस्पताल में
एडमिट करवाया।
डॉक्टरों की मानें तो दोनों मरीजों का टेस्ट करवाया गया है
और उन्हें टेमीफ्लू भी दी गई है। रिपोर्ट आने के बाद स्थिति का पता चलेगा।
इससे पहले पिंजौर व कालका के दो मरीजों की स्वाइन फ्लू से इसी हफ्ते मौत हो
चुकी है।
रोहतक पीजीआई में 24 घंटे में 3 की मौत
पीजीआई में स्वाइन फ्लू की चपेट का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। 24 घंटे में स्वाइन फ्लू से हुई तीन मौत ने पीजीआई व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हैरानी की बात तो यह है कि स्वाइन फ्लू से ग्रसित तीनों मरीज पीजीआई में उपचाराधीन थे।
इसके अलावा अभी भी विभिन्न विभागों में 13 मरीज उपचाराधीन हैं और इनमें से 5 की हालत नाजुक बनी हुई है। शनिवार को पीजीआई में स्वाइन फ्लू से दो महिला और एक पुरुष मरीज की मौत हो गई। इनमें से 1 महिला गर्भवती थी।
अभी संस्थान के आईसीयू कक्ष में 7 और मरीज वेंटीलेटर पर उपचाराधीन हैं। दो महिला मरीजों में एक और गर्भवती महिला स्वाइन फ्लू से पीड़ित है।
सात और स्वाइन फ्लू पीड़ित
पीजीआई के नोडल अधिकारी एवं वरिष्ठ डॉक्टर डॉ. ध्रुव चौधरी ने बताया कि शनिवार करनाल से 1 और गर्भवती महिला उपचार के लिए आई है। यह महिला भी स्वाइन फ्लू की संदिग्ध है। अब पीजीआई में कुल 13 मरीज उपचाराधीन हैं, इसमें 7 को स्वाइन फ्लू है। जिसमें पांच मरीज की हालत अभी नाजुक बनी हुई है।
संसाधन की कमी से उठ रहे सवाल
जागरुकता और संसाधनों की कमी के चलते पीजीआई में स्वाइन फ्लू के उपचार में जुटे डॉक्टर व स्टाफ भी असुरक्षित है। उपचार में जुटे एक्सपर्ट की मानें तो स्वाइन फ्लू के मरीजों को रखने का अलग कक्ष होना चाहिए, ताकी संक्रमण अन्य लोगों को न फैले। जबकि पीजीआई में निर्धारित मानकों पर तैयार आईसोलेटेड रूम ही नहीं है। वहीं पीजीआई में आने वाले मरीजों के स्वैब को जांच के लिए दिल्ली भेजा जाता है।
बोले अधिकारी
पीजीआई में स्वाइन फ्लू का उपचार किया जा रहा है, यहां उपलब्ध सुविधाओं की जांच कर स्थिति का निरीक्षण किया जाएगा। जो भी अतिरिक्त सुविधाओं की जरूरत होगी वह विभाग को उपलब्ध कराई जाएगी।
- डॉ. रोहताश यादव, कार्यकारी निदेशक, पीजीआई