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एसवाईएल नहर: राजनीति तो चलती रहेगी, पहले इसका खतरा तो टालो

Mon, 01 Aug 2016 10:07 PM IST
मोहित धुपड़/अमर उजाला, अंबाला(हरियाणा)
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सतलुज यमुना लिंक नहर - फोटो : फाइल फोटो
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एसवाईएल नहर के मुद्दे पर पंजाब और हरियाणा सरकार आमने-सामने हैं। ये नहर जहां पंजाब और हरियाणा की राजनीति का बड़ा मुद्दा बनी हुई है, वहीं विभिन्न राजनीतिक पार्टियां चुनावी मौसम में इस मुद्दे को उछालना और इस पर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकना नहीं भूलतीं। लेकिन इसके लगातार बढ़ रहे खतरे से शायद सभी अनभिज्ञ बने हुए हैं।
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मरम्मत के अभाव में ये नहर लगातार जर्जर होती जा रही है। बरसाती पानी से बांध में कटाव होता जा रहा है। कई बार बांध टूटकर तबाही मचा चुके हैं, उसके बावजूद इसकी मौजूदा हालात की सुध लेने वाला कोई नहीं है। स्थानीय किसानों व ग्रामीणों का कहना है कि इस नहर पर राजनीति करना अलग बात है, वे तो बस ये चाहते हैं कि कम से कम इससे हर साल होने वाले खतरे को किसी तरह टाल दिया जाए।

इसी का जायजा लेने ‘अमर उजाला’ ने पंजाब के पटियाला जिला स्थित लाछडृ कलां से अंबाला और उससे आगे कुरुक्षेत्र बार्डर तक इस नहर के मौजूदा हालात का जायजा लिया। यहां के हालात काफी भयावह हैं। इस बार जबरदस्त बारिश की संभावना है। यदि ऐसा हुआ तो नि:संदेह एसवाईएल एक बड़ी तबाही का कारण बन सकती है, जबकि ऐसा पहले हो भी चुका है।
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इस तरह पैदा होता है खतरा

सतलुज यमुना लिंक नहर - फोटो : फाइल फोटो
- पंजाब के पटियाला स्थित गन्नौर विधानसभा क्षेत्र से होती हुई ये सतलुज-यमुना लिंक नहर (एसवाईएल) अंबाला में एंट्री करती है और आगे निकल जाती है।
- नहर के दोनों किनारे पूरी तरह से जर्जर हो चुके हैं, पर पटियाला के लाछड़ू कलां गांव के पास इस नहर का खतरा बढ़ जाता है
- यहां पांच किलोमीटर दायरे में हिमाचल की ओर से आने वाली एक लंबी बरसाती नहर पच्ची दर्रा एसवाईएल नहर से गुजरती है
- हिमाचल, पंजाब, चंडीगढ़ का बरसाती पानी घग्गर नदी के अलावा इसी पच्ची दर्रा बरसाती नहर के जरिये भी आगे निकाला जाता है। ये नहर आगे जाकर घग्गर नदी में ही मिल जाती है
-पांच किलोमीटर दायरे में ये बरसाती नहर एसवाईएल नहर के साथ-साथ गुजरती है
-इस पांच किलोमीटर बांध की सालों से मरम्मत न होने की वजह से यहां बरसाती नहर के किनारे दरक चुके हैं, जबकि बांध पर भी कई जगह बरसाती पानी की वजह से मिट्टी खिसक चुकी है
- बरसाती नहर में उफान होने के दौरान इसी पांच किलोमीटर दायरे में ये पच्ची दर्रा नहर का बांध टूटता है और पानी पहले से ही जर्जर एसवाईएल में घुस जाता है।
- पानी का वेग इतना ज्यादा होता है कि एसवाईएल के जर्जर किनारे उसे संभाल नहीं पाते और ओवलफ्लो की स्थिति में यहां अंबाला में एंट्री करते ही विभिन्न जगहों पर टूटकर गांवों में तबाही मचाते हैं।
- अंबाला में एंट्री के बाद कुरुक्षेत्र बार्डर तक भी एसवाईएल के दोनों किनारों से मिट्टी दरकी चुकी है और किनारे काफी खतरनाक स्थिति में हैं। इससे यहां अंबाला के लगभग 20 गांव हमेशा डूबने के खतरे की जद में रहते हैं।
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एसवाईएल की मरम्मत को फंड नहीं

सतलुज यमुना लिंक नहर - फोटो : फाइल फोटो
एसवाईएल नहर पंजाब से लेकर हरियाणा में पूरी तरह से जर्जर हालत में हैं। लेकिन पटियाला और अंबाला के संबंधित अधिकारियों का कहना है कि वे क्या करें ? उनके पास इस नहर की मरम्मत के लिए कोई फंड नहीं है। एसवाईएल डिविजन के एक्सईएन संदीप कुमार कहते हैं कि विभाग की ओर से एसवाईएल नहर के किनारों की मरम्मत के लिए कोई फंड नहीं आता, फिर से भी जैसे-तैसे कर विभाग इसके बांध की दरकती मिट्टी को ठीक करता रहता है।

उधर, पटियाला के पीडब्ल्यूडी बीएंडआर विभाग के जेई शमशेर सिंह कहते हैं लछाड़ू कलां में पच्ची दर्रा और एसवाईएल नहर के बीच बने बांध पर की हालत खराब है। यहां दो-तीन प्वाइंट खतरनाक है, लेकिन वे क्या करें इसकी मरम्मत के लिए अभी फंड का प्रावधान नहीं है।

ये है एसवाईएल के मौजूदा हालात
ये नहर पंजाब के इलाके में काफी चौड़ी है और इसमें बहुत ज्यादा मिट्टी रूपी गाद जम चुकी है। लछाड़ू कलां के पास तो नहर में मैदान जैसा नजारा दिखता है। पंजाब इलाके में नहर के दोनों ओर सीमेंट के बांध बनाए गए थे, लेकिन वर्षों बाद भी दोनों ओर सीमेंट के ये बांध बुरी तरह से टूटकर बह चुके हैं।

हरियाणा में एंट्री होने पर दोनों ओर यही किनारे ईंटों के बने हुए हैं। इनकी हालत बहुत ज्यादा खराब है। ईंटे बह चुकी हैं, बांध लगातार दरकता जा रहा है। किनारों की मिट्टी पानी के साथ बहती जा रही है। बीच में इस नहर में काफी इलाके में झाड़ियों व सरकंडे का जंगलनुमा क्षेत्र है। फंड के अभाव में नहर के हालात बहुत खराब हो चुके हैं।

 
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