फुटबॉल की दुनिया में 'विश्वा' नाम से प्रसिद्ध विश्व प्रकाश वालिया नहीं रहे। अंबाला में उनका अंतिम संस्कार किया गया। विश्व प्रकाश ने वीरवार सुबह 86 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया। चौदह साल की उम्र में 1944 में फुटबॉल से रूबरू हुए ‘विश्वा को मालूम नहीं था कि वे एक दिन अंबाला, देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी खेल प्रतिभा का सिक्का जमाएंगे।
लेकिन फुटबॉल को जुनून बना चुके विश्व प्रकाश वालिया विश्वा को एक ऐसे उस्ताद की शागिर्दी नसीब हुई, जिसने न केवल उनकी जिंदगी बदल दी, बल्कि उनके खेल प्रतिभा को एक खास मुकाम दिया। विश्व प्रकाश वालिया अंबाला में फुटबॉल शुरू करने वाले एसडी चटर्जी (कोलकाता से परिवार अंबाला आया था) के होनहार शागिर्दों में से एक थे। बस, उन्हीं की शागिर्दी हासिल कर विश्व प्रकाश ने फुटबॉल जगत में फिर मुड़कर नहीं देखा और चटर्जी दादा ने विश्व प्रकाश वालिया को फुटबाल जगत का ‘विश्वा’ बना दिया।
उन्होंने कई मैडल जीते, कई शील्ड और कई पुरस्कार अपनी टीम के साथ अपनी झोली में बटौरे। लेकिन वीरवार को 86 साल का पड़ाव पार करने वाले विश्व प्रकाश वालिया का निधन हो गया। आखिरी दम तक विश्वा फुटबॉल को जीते रहे। पहले खिलाड़ी बनकर और फिर प्रेरक बनकर। फुटबाल जगत में उनके इसी योगदान को देखते हुए हरियाणा के खेल मंत्री अनिल विज सुबह उनके आवास स्थान पर पहुंचे और उन्होंने फुटबालर विश्वा की अर्थी को कंधा दिया।
विज थोड़ी दूर तक उनकी अर्थी को कंधा देकर चलते रहे और फिर दाह संस्कार के दौरान भी मौजूद रहे। इस दौरान विश्वा के बेटे संजीव वालिया, बेटी डॉ. ममता, पत्नी सरला वालिया, पुत्रवधू सीमा वालिया, डॉ. राहुल एंड डॉ. मीतू, महक, जतिन बत्रा, महिमा, अर्निबन दास, वरदान वालिया, आर्यन, अमाइरा व नायरा समेत अंबाला के गण्यमान्य व्यक्तियों व समाज सेवियों ने उन्हें उपस्थित रहकर श्रद्धांजलि दी।