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इंटरनेशनल फुटबॉलर विश्व प्रकाश नहीं रहे, खेलमंत्री ने दिया कंधा

Sat, 16 Jul 2016 10:11 AM IST
मोहित धुपड़/अमर उजाला, अंबाला कैंट
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इंटरनेशनल फुटबालर विश्व प्रकाश ​का अंतिम संस्कार - फोटो : अमर उजाला
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फुटबॉल की दुनिया में 'विश्वा' नाम से प्रसिद्ध विश्व प्रकाश  वालिया नहीं रहे। अंबाला में उनका अंतिम संस्कार किया गया। विश्व प्रकाश ने वीरवार सुबह 86 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया। चौदह साल की उम्र में 1944 में फुटबॉल से रूबरू हुए ‘विश्वा को मालूम नहीं था कि वे एक दिन अंबाला, देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी खेल प्रतिभा का सिक्का जमाएंगे।
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लेकिन फुटबॉल को जुनून बना चुके विश्व प्रकाश वालिया विश्वा को एक ऐसे उस्ताद की शागिर्दी नसीब हुई, जिसने न केवल उनकी जिंदगी बदल दी, बल्कि उनके खेल प्रतिभा को एक खास मुकाम दिया। विश्व प्रकाश वालिया अंबाला में फुटबॉल शुरू करने वाले एसडी चटर्जी (कोलकाता से परिवार अंबाला आया था) के होनहार शागिर्दों में से एक थे। बस, उन्हीं की शागिर्दी हासिल कर विश्व प्रकाश ने फुटबॉल जगत में फिर मुड़कर नहीं देखा और चटर्जी दादा ने विश्व प्रकाश वालिया को फुटबाल जगत का ‘विश्वा’ बना दिया।

उन्होंने कई मैडल जीते, कई शील्ड और कई पुरस्कार अपनी टीम के साथ अपनी झोली में बटौरे। लेकिन वीरवार को 86 साल का पड़ाव पार करने वाले विश्व प्रकाश वालिया का निधन हो गया। आखिरी दम तक विश्वा फुटबॉल को जीते रहे। पहले खिलाड़ी बनकर और फिर प्रेरक बनकर। फुटबाल जगत में उनके इसी योगदान को देखते हुए हरियाणा के खेल मंत्री अनिल विज सुबह उनके आवास स्थान पर पहुंचे और उन्होंने फुटबालर विश्वा की अर्थी को कंधा दिया।
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विज थोड़ी दूर तक उनकी अर्थी को कंधा देकर चलते रहे और फिर दाह संस्कार के दौरान भी मौजूद रहे। इस दौरान विश्वा के बेटे संजीव वालिया, बेटी डॉ. ममता, पत्नी सरला वालिया, पुत्रवधू सीमा वालिया, डॉ. राहुल एंड डॉ. मीतू, महक, जतिन बत्रा, महिमा, अर्निबन दास, वरदान वालिया, आर्यन, अमाइरा व नायरा समेत अंबाला के गण्यमान्य व्यक्तियों व समाज सेवियों ने उन्हें उपस्थित रहकर श्रद्धांजलि दी।

शॉर्ट पास टेक्निक ईजाद करने वालों में थे विश्वा

इंटरनेशनल फुटबालर विश्व प्रकाश ​का अंतिम संस्कार - फोटो : फाइल फोटो
विश्व प्रकाश वालिया उस वक्त चटर्जी दादा की अंबाला हीरोज क्लब टीम के शानदार प्लेयर थे। इस टीम में रहकर उन्होंने देश की बड़े-बड़े फुटबाल क्लबों, बंटवारे के बाद पाकिस्तान की टीमों को भी अंबाला व दूसरे शहरों की जमीन पर धूल चटाई थी। उन दिनों फुटबाल में लांग पास दिए जाने का प्रचलन बहुत ज्यादा था।

इससे खेल मुश्किल भी होता था और रोमांच से भी दूर रहता था। जब एसडी चटर्जी ने अपने साथियों के साथ मिलकर शार्ट पास टेक्निक शुरू करने का विचार किया और विश्वा ने इसे बहुत बेहतर बताते हुए दादा के साथ इसकी प्रेक्टिस शुरू की। उसके बाद फुटबाल में शार्ट पास की तकनीक बहुत ज्यादा प्रचलित हुई और खेल में रोमांच भी बनता गया।

कायल थे अंग्रेज, तोहफे में दिया फुटबॉल का मैदान
आजादी से थोड़ा पहले एक समय ऐसा आ गया था कि चटर्जी दादा की अंबाला हीरोज क्लब का डंका बोलने लगा। विश्वा भी उस टीम का हिस्सा थे। हालांकि इस दौरान विश्वा छोटे थे, लेकिन दादा की खूबियत के प्रभाव में रहते थे।

इस टीम की परफोरमेंस देखकर अंग्रेजों ने चटर्जी को ब्रिटिश फौजियों का फुटबाल कोच बनने का आग्रह किया था और साथ ही ब्रिटिश फौज में ही बढिय़ा नौकरी का ऑफर भी दिया था। लेकिन चटर्जी दादा ने न केवल ये ऑफ ठुकराया, बल्कि अंग्रेजों को अपनी टीम के साथ फुटबाल मुकाबले की चुनौती भी दी।

चटर्जी की इसी टीम ने शानदार खेलते हुए अंग्रेजों की फुटबाल टीम को हरा दिया। उसके बाद जीत से खुश होकर इनाम बांटने की अपनी पंरपरा के चलते अंग्रेजों ने अंबाला टीम के इन फुटबाल खिलाड़ियों को कैंट के बीचोंबीच एक शानदार फुटबाल मैदान तोहफे में दिया। जिसका नाम रॉबर्ट पैवेलियन रखा गया। आज भी ये मैदान मौजूद है।
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...अपना फाइनल पूरा कर गए विश्वा

इंटरनेशनल फुटबालर विश्व प्रकाश ​का अंतिम संस्कार - फोटो : अमर उजाला
अंतरराष्ट्रीय फुटबालर रहे विश्वा अंबाला में फुटबॉल के जन्मदामा एसडी चटर्जी के बहुत नजदीक थे। यही वजह रही कि चटर्जी विश्वा को बहुत प्यार भी करते थे। मरने से पूर्व विश्वा ने अमर उजाला को बताया था कि उन्हे याद है एक बार उनके उस्ताद चटर्जी दादा की हालत बहुत खराब हो गई थी और उन्हें उनके परिजनों ने उन्हें बैड से उताकर नीचे जमीन पर लेटा दिया था और बंगाली रिती रिवाज के अनुसार मरने से पूर्व कुछ जरूरी कर्मकांड करने शुरू कर दिए थे।

विश्वा के अनुसार उस वक्त उनके उस्ताद ने उन्हें नजदीक बुलाया और उनके कान में कहा कि विश्वा इन्हें समझाओ, ये मेरी जिंदगी का सेमी फाइनल है, न कि फाइनल। यह सुनकर विश्वा ने उन्हें और बेहतर इलाज दिलवाने पर जोर दिया और चटर्जी बच गए और कई साल तक भी जिए और अपनी टीम को कई और मैच भी जितवाएं। लेकिन अपने उस्ताद को बचाने वाले विश्वा वीरवार को अपनी जीवन का फाइनल मैच पूरा कर गए।

विश्वा की अंतिम इच्छा थी कि वे भारत की फुटबाल टीम को विश्व कप में खेलता देखें। उधर, खेल मंत्री अनिल विज का कहना है विश्व प्रकाश वालिया जैसे समर्पित प्लेयर बरसों में कभी पैदा होते हैं, खेल जगत में उनकी कमी हमेशा खलेगी।

 
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