हरियाणा में 9455 जेबीटी टीचर की नियुक्ति के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट को सख्त निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को मामले में दो महीने में फैसला तय करने को कहा है, ताकि नियुक्तियों में होने वाली अनावश्यक देरी को टाला जा सके।
चयनित जेबीटी संघर्ष समिति की और से सोमदत्त व अन्य चयनित जेबीटी शिक्षकों ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर कर हाईकोर्ट के इस मामले में स्टे ऑर्डर होने की वजह से नियुक्तियों में देरी का मुद्दा उठाया था।
छह साल बाद भी पूरी नहीं हो सकी है नियुक्ति प्रक्रिया
जेबीटी अध्यापकों का प्रदर्शन
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याचिकाकर्ता के वकील ने बेंच को बताया कि हाईकोर्ट ने तिलकराज बनाम हरियाणा सरकार केस में 30 मार्च 2011 को रेगुलर जेबीटी भर्ती 31 दिसम्बर 2011 तक पूरी करने के आदेश दिए। थे। लेकिन करीब छह साल का समय बीतने के बाद भी भर्ती पूरी नहीं हो सकी।
रेग्यूलर जेबीटी भर्ती के नजीते भी करीब दो वर्ष पहले आ चुके हैं, लेकिन बार-बार आ रही कानूनी अड़चनों के बाद हाईकोर्ट की ओर से 11 मई को स्टे ऑर्डर जारी कर दिया गया, जिससे नियुक्तियां होने में देरी हो रही है।
2014 में हाईकोर्ट को दिया था फैसला करने का आदेश
कोर्ट
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बहस के दौरान बेंच को बताया गया कि तिलकराज केस में दायर अवमानना याचिका में सुप्रीम कोर्ट ने 26 मार्च 2014 को भी हाईकोर्ट को अंतिम कुमारी केस का जल्दी फैसला करने व नियुक्तियां करने का आदेश दिया था। बहस सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस शिवा कीर्ति सिंह व जस्टिस आर. भानुमति की बेंच ने हाईकोर्ट को जेबीटी की नियुक्तियों पर रोक संबंधी केस का दो महीने में अंतिम फैसला सुनाने को कहा है।