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बैलगाड़ी दौड़ के शौकीनों के लिए बुरी खबर

Sat, 10 May 2014 01:11 PM IST
अखिल तलवार/अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब के गांवों में होने वाले खेल मेलों में रौनक रही बैलगाड़ी दौड़ पर सुप्रीम कोर्ट ने पाबंदी लगा दी है। कोर्ट का कहना है कि बैलों को ‘परफॉर्मिंग एनिमल’ के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। बैल जब डरता है, तभी लड़ता या भागता है।
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उसके इस रिस्पॉन्स को झल्लीकट्टू या बैलगाड़ी दौड़ के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इस फैसले से लुधियाना के निकट किला रायपुर में हर साल होने वाले ग्रामीण मिनी ओलंपिक की रौनक पर भी असर पड़ेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने जारी आदेश के तहत तमिलनाडु में झल्लीकट्टू (बुल-फाइटिंग) पर रोक लगाने के साथ ही पंजाब, महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों में बैलगाड़ी दौड़ पर भी पाबंदी लगा दी है।
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आदेश में कहा गया है कि सर्वोच्च न्यायालय ने सरकारों और एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया से कहा है कि जानवरों के प्रति क्रूरता रोकने को कानून सख्ती से लागू कराएं।

रायपुर का ग्रामीण खेल होगा प्रभावित

सुप्रीम कोर्ट के आदेश से पंजाब में सबसे ज्यादा प्रभावित किला रायपुर का ग्रामीण खेल मेला होगा। 1933 से चले आ रहे इस मेले में बैलगाड़ी दौड़ खास आकर्षण है। इसे देखने केलिए बड़ी संख्या में एनआरआई भी आते हैं।

इस दौड़ में पंजाब भर से करीब डेढ़ सौ लोग हिस्सा लेते हैं। चार दिन चलने वाले मेले में करीब पांच लाख दर्शक जुटते हैं। इसके अलावा सराभा, गुज्जरवाल, नारंगवाल, रोपड़, संगरूर समेत कई जगह खेल मेलों का प्रमुख आकर्षण बैलगाड़ी दौड़ होती है, जो अब नहीं दिखेगी।

एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया के मेंबर डॉ. संदीप जैन ने कहा कि यह फैसला स्वागत योग्य है। लंबे समय से पशु प्रेमी इसकी मांग कर रहे थे। फैसले के दूरगामी नतीजे होंगे, यह लोगों को जागरूक करेगा।

पहले भी लग चुकी है रोक

किला रायपुर खेल मेले में बैलगाड़ी दौड़ पर पहले भी स्थानीय स्तर पर रोक लग चुकी है। पीपुल फॉर एनिमल्स ने वर्ष 2000 में बैलगाड़ी दौड़ पर रोक लगवा दी थी, जिसे बाद में फिर शुरू कर दिया गया।

2011 में वन मंत्रालय ने इस संबंध में नोटीफिकेशन जारी किया तो 2012 में फिर किला रायपुर खेल मेले में बैलगाड़ी दौड़ पर पाबंदी लग गई। लेकिन मेला आयोजकों को हाईकोर्ट से राहत मिल गई और दौड़ दोबारा शुरू हो गई थी।

मेला आयोजक जाएंगे अदालत

किला रायपुर खेल मेले केआयोजक हरदीप गरेवाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश पंजाब पर भी लागू होगा इसलिए कानूनी राय ली जा रही है।

फिलहाल बैलगाड़ी दौड़ में हिस्सा लेने वाले जमींदारों से संपर्क कर रहे हैं। फिर कानूनी सलाह के बाद सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर करेंगे। अपील की जाएगी कि बैलगाड़ी दौड़ की इजाजत दी जाए।

फैसले से कई पारंपरिक खेलों पर संकट

सुप्रीम कोर्ट की बैलगाड़ी दौड़ पर पाबंदी का आदेश पंजाब के कई और पारंपरिक ग्रामीण खेलों को भी प्रभावित करेगा। पंजाब के मेलों में कुत्तों की दौड़ भी प्रमुख खेल है। इसके भी प्रभावित होने की आशंका है।

इसके अलावा मुक्तसर, अबोहर, फाजिल्का आदि इलाकों में कुत्तों की लड़ाई कराई जाती है। जिसमें खास नस्ल पिट बुल टैरियर के कुत्ते लड़ते हैं। इसकेअलावा मुर्गों की लड़ाई भी होती है।

हालांकि कुत्तों और मुर्गों की लड़ाई चोरी-छिपे ही होती है। हर गांव में कबूतरबाजी के मुकाबले भी कराए जाते हैं। गांव के लोगों को आशंका है कि इस पर पाबंदी लग जाएगी।
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कारोबार होगा प्रभावित

सुप्रीम कोर्ट के आदेश से पंजाब में लाखों का कारोबार भी प्रभावित होगा। बड़ी संख्या में लोगों ने खास बैल और कुत्ते पाल रखे हैं। ये ज्यादातर खेल मेलों में हिस्सा लेते हैं, जहां इनाम की राशि भी काफी होती है। ये जानवर साल में अच्छी कमाई करते हैं।

पशु पालक का नाम भी होता है। मोरिंडा केपास गांव राऊमाजरा के बैल पालक सरब द्योल ने कहा कि मेलों में हिस्सा लेने वाले जानवरों को अपने बच्चों की तरह पाला जाता है। उनकी खुराक पर भी काफी रुपये खर्च किए जाते हैं।

उन पर अत्याचार का तो सवाल ही नहीं उठता। ट्रैक्टर के आने के बाद बैलों से खेती खत्म हो गई है। अब बैलगाड़ी दौड़ खत्म होने के बाद वे लावारिस हो जाएंगे।
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