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किल्लत दूर : चार दिन में 50 प्रतिशत ऑक्सीजन बचाकर निजी अस्पतालों को सप्लाई

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चंडीगढ़। कोरोना के मरीजों के लिए स्वास्थ्य विभाग का ऑक्सीजन जनरेटर प्लांट वरदान साबित होने लगा है। इस जनरेटर प्लांट की मदद से विभाग ने बीते 4 दिनों में 50 प्रतिशत लिक्विड ऑक्सीजन की बचत कर ली है। इतना ही नहीं उस बचे हुए लिक्विड ऑक्सीजन को उन निजी अस्पतालों में भेजा गया है, जहां इसकी किल्लत हो रही थी।
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स्वास्थ्य निदेशक डॉ. अमनदीप कंग का कहना है कि जीएमसीएच 16, जीएमसीएच- 32 और सेक्टर- 45 सिविल अस्पताल में लगाए गए ऑक्सीजन जनरेटर प्लांट की मदद से हवा से बनाए जाने वाले ऑक्सीजन को सरकारी के साथ ही निजी अस्पतालों में देना सुनिश्चित किया जा चुका है। ऐसी स्थिति में शहर में ऑक्सीजन की कमी नहीं होगी। सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में ऑक्सीजन की उपलब्धता सुनिश्चित हो जाने से इसकी कालाबाजारी वाली स्थिति भी उत्पन्न नहीं हो पाएगी।
4 दिन में 20 मीट्रिक टन से ज्यादा की बचत
जीएमएसएच- 16, जीएमसीएच- 32 और सेक्टर- 45 के सिविल अस्पताल में लगाए गए प्लांट से चार दिनों में 21 मीट्रिक टन लिक्विड ऑक्सीजन की बचत की जा चुकी है। डॉ. मंजीत ने बताया कि सरकार द्वारा जारी किए गए आदेश के अनुसार चंडीगढ़ को एक दिन में 20 मीट्रिक टन ऑक्सीजन प्राप्त होता है। उनके अनुसार पांच मीट्रिक टन से लगभग 500 ऑक्सीजन सिलेंडर भरे जा सकते हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने 23 अप्रैल से 26 अप्रैल के बीच 21 मेट्रिक टन लिक्विड ऑक्सीजन की बचत कर ली है।
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चार दिनों में इतनी हुई खपत (20 मीट्रिक टन में से )
23 अप्रैल : 20 में से 17.1 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की हुई खपत
24 अप्रैल : स्टॉक पूरा होने के कारण नहीं लिया गया
25 अप्रैल : 11.4 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की हुई खपत
26 अप्रैल को 10.3 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की हुई खपत
लिक्विड ऑक्सीजन को गैस में परिवर्तित कर दिया जा रहा निजी अस्पतालों में
डॉ. मंजीत ने बताया कि तीनों अस्पतालों से जनरेटर प्लांट से लिक्विड ऑक्सीजन को अन्य अस्पतालों में भेजना संभव नहीं है। इसलिए ऑक्सीजन देने वाली कंपनी के जरिए उसे गैस में परिवर्तित करके निजी अस्पतालों में भेजा जा रहा है। इस प्रक्रिया से निजी अस्पतालों में ऑक्सीजन की किल्लत को काफी हद तक नियंत्रित करना शुरू कर दिया गया है।
क्या कहते हैं अधिकारी
ऑक्सीजन जनरेटर प्लांट की मदद से स्वास्थ विभाग काफी मात्रा में लिक्विड ऑक्सीजन की बचत कर रहा है। इससे सरकारी अस्पतालों के साथ ही शहर के निजी अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी को पूरा किया जाना शुरू कर दिया गया है। -डॉ. अमनदीप कंग, स्वास्थ्य निदेशक
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