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लॉकडाउन: टूट रही है दवाओं की सप्लाई चेन, बद्दी-हरिद्वार से अब तक दो बार आई खेप

Sun, 12 Apr 2020 02:27 AM IST
दुष्यंत शर्मा दीपक शाही, जीरकपुर
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
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लॉकडाउन से अब होलसेल दवा का कारोबार प्रभावित होने लगा है। 19 दिनों के लॉकडाउन के दौरान जीरकपुर में बद्दी और हरिद्वार से महज दो से तीन बार ही दवाओं की खेप आई है। जबकि महीने में 20 से 25 बार सप्लाई आती थी। 

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इसके पीछे वजह प्रोडक्शन का बंद होना है। क्योंकि कोरोना संक्रमण के चलते कंपनियों को काम करने वाले मुलाजिम नहीं मिल रहे हैं।  इसके चलते सप्लाई की चेन टूटने लगी है। पहले महीने में जहां पांच करोड़ रुपये की दवाओं की सेल होती थी, अब वह घटकर ढाई करोड़ रुपये हो गई है।  बता दें कि जीरकपुर से पूरे देश के अलग अलग राज्यों (पंजाब, हरियाणा, जेएंडके यूपी सहित अन्य) में दवा की सप्लाई की जा रही है।  

टूटने लगी सप्लाई चेन
कोरोना वायरस के चलते अधिकतर मजदूर पलायन कर गए हैं। ऐसे में कई फैक्ट्रियां बंद पड़ी हैं। सीएंडएफएस के ऑनर संजीव कुमार बंसल ने बताया कि बद्दी में प्रोडक्शन बंद होने के चलते उनके पास महज एक बार दवाइयों की सप्लाई आई है। अभी फिलहाल सेंट्रल वेयर हाउस में रखे गए स्टाक से काम चलाया जा रहा है। लेकिन अगर स्टाफ नहीं पहुंचा तो चेन टूट जाएगी। संजीव बंसल ने बताया कि उनका ज्यादातर स्टाफ पभात, रामदरबार, चंडीगढ़ इंडस्ट्रियल एरिया में रहता है। अब उनके यहां आने पर ही पाबंदी लग गई है। 
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सीएम को इंश्योरेंस के लिए लिखा पत्र 
जीरकपुर में 300 से ज्यादा फार्मा कंपनियां काम कर रही हैं। जो बड़ी कंपनियां है, उनमें ईएसआई का लाभ मुलाजिमों को मिल रहा है, लेकिन कुछ छोटी कंपनियां भी हैं, जिनमें मुलाजिमों की संख्या 5 से 7 के बीच है। इन मुलाजिमों को ईएसआई का लाभ नहीं मिल पा रहा है, लेकिन वे भी मेडिकल स्टाफ तरह कोरोना के जंग में अहम भूमिका निभा रहे हैं। क्योंकि दवा रिटेलरों के तक दवा पहुंचाने के बीच की कड़ी में ये मुलाजिम शामिल हैं। इसलिए सीएंडएफएस एसोसिएशन ने पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह को जीरकपुर के छोटे फार्मा कंपनियों में काम करने वाले मुलाजिमों के इंश्योरेंस की मांग की है।

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