पंचकूला। बहुचर्चित मानेसर भूमि घोटाले के मामले में सीबीआई की विशेष अदालत में मंगलवार को सुनवाई हुई। मामले में मुख्य आरोपी पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा मंगलवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये अदालत में पेश हुए। जबकि अन्य सभी आरोपी प्रत्यक्ष रूप से पेश हुए। सीबीआई अदालत ने पांच आरोपियों को राजीव अरोड़ा, डीआर ढींगरा, सुरजीत सिंह, धौर्य सिंह और कुलवंत सिंह लांबा को पेश होने के समन जारी किए हैं। वहीं अदालत ने सुनवाई के दौरान आरोपी एमएल तायल, जसवंत सिंह और सुदीप ढिल्लों की ओर से दायर की गई डिस्चार्ज अर्जी खारिज कर दी। अब अगली सुनवाई 17 दिसंबर को होगी। इस दिन पांचों आरोपियों को भी पेश होना होगा। आरोप तय होने पर फैसला अब इन पांच आरोपियों की पेशी के बाद ही होगा।
ये है मामला
अगस्त 2014 में निजी बिल्डरों ने हरियाणा सरकार के अज्ञात जनसेवकों के साथ मिलीभगत से गुरुग्राम जिले में मानसेर, नौरंगपुर और लखनौला गांवों के किसानों और भूस्वामियों को अधिग्रहण का भय दिखाकर उनकी करीब 400 एकड़ जमीन सस्ते दामों में खरीद ली थी। कांग्रेस की तत्कालीन हुड्डा सरकार पर करीब 900 एकड़ जमीन का अधिग्रहण करके उसे औने-पौने दाम पर बेचने का आरोप है। सीबीआई ने पूर्व मुख्यमंत्री एवं मामले के आरोपी भूपेंद्र सिंह हुड्डा समेत 34 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट फाइल की थी। चार्जशीट में भूपेंद्र सिंह हुड्डा के अलावा एमएल तायल, छतर सिंह, एसएस ढिल्लों, पूर्व डीटीपी जसवंत सहित कई बिल्डरों के नाम हैं। सीबीआई ने पूर्व सीएम सहित 34 के खिलाफ 17 सितंबर 2015 को मामला दर्ज किया था।
इस मामले में ईडी ने भी हुड्डा के खिलाफ सितंबर 2016 में मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था। ईडी ने हुड्डा और अन्य के खिलाफ सीबीआई की एफआईआर के आधार पर आपराधिक मामला दर्ज किया था।