आईएएस अधिकारी के बेटे बलवंत सिंह मुल्तानी के लापता होने के लगभग 29 साल पुराने मामले की सुनवाई सोमवार को सीबीआई अदालत में हुई। इस दौरान सीबीआई ने अदालत में कहा कि कोरोना महामारी के चलते स्टाफ की कमी से अभी उन्हें केस से संबधित रिकॉर्ड नहीं मिल पाया है। इस पर अदालत ने उन्हें एक दिन का समय और दिया है। मामले में पंजाब पुलिस के पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी समेत चंडीगढ़ पुलिस के आठ पूर्व मुलाजिमों पर किडनैपिंग का केस दर्ज किया गया है। अब मामले की सुनवाई 23 जून को होगी।
दरअसल, पंजाब पुलिस ने याचिका दायर कर पंजाब के पूर्व डीजीपी सुमेध सैनी मामले से संबंधित एफआईआर का रिकॉर्ड मांगा था, जिस पर सीबीआई ने कहा था कि उनके पास रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। इस पर पंजाब पुलिस ने सीबीआई को जवाब देते हुए कहा था कि 2016 में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में इस मामले की स्टेटस रिपोर्ट दायर की गई थी तो सीबीआई यह कैसे कह सकती है कि उनके पास केस से संबंधित कोई रिकॉर्ड नहीं है।
यह है मामला
1991 में सुमेध सिंह सैनी चंडीगढ़ में एसएसपी के पद पर तैनात थे। इस दौरान सैनी पर एक जानलेवा आतंकी हमला हुआ था। इस हमले में उनकी सुरक्षा में तैनात चार मुलाजिम मारे गए थे। इस दौरान चंडीगढ़ पुलिस के दो अधिकारियों ने बलवंत सिंह मुल्तानी को 11 दिसंबर, 1991 को मोहाली स्थित उसके घर से उठा लिया था। उन्होंने इसकी जानकारी किसी को नहीं दी थी।
सीबीआई द्वारा 2008 में दर्ज किए मामले में बलवंत सिंह मुल्तानी के भाई पलविंदर सिंह ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि तत्कालीन एसएसपी चंडीगढ़ सुमेध सिंह सैनी के आदेश पर उसके भाई को सेक्टर-17 पुलिस थाने ले जाया गया था। इस पर उन्होंने मुल्तानी के अपहरण की शिकायत दर्ज कराई थी। हाईकोर्ट के आदेश पर प्राथमिक जांच की गई थी। शिकायतकर्ता ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।