भुलत्थ से कांग्रेस विधायक और किसान कांग्रेस के प्रधान सुखपाल सिंह खैरा ने पंजाब के राज्यपाल को पत्र लिखकर 22 सितंबर को राज्य सरकार द्वारा बुलाए गए विधानसभा के विशेष सत्र की अनुमति न देने का आग्रह किया है। उन्होंने पत्र में विधानसभा के इस विशेष सत्र को असंवैधानिक बताते हुए कहा है कि सदन की प्रक्रिया और कार्य संचालन के नियमों के तहत विश्वास प्रस्ताव का कोई प्रावधान नहीं है।
खैरा ने पत्र में लिखा है कि भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी की सरकार ने अपना बहुमत साबित करने के लिए तथाकथित 'ऑपरेशन लोटस' की आड़ में केवल अफवाहों और अस्पष्ट आरोपों के आधार पर पंजाब विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र का प्रस्ताव रखा है, ताकि अपने मंत्रिपरिषद के पक्ष में विश्वास प्रस्ताव पारित कर सके।
खैरा ने कार्यवाही संबंधी नियमों का दिया हवाला
खैरा ने पत्र के साथ कार्य नियमावली की प्रति जोड़ते हुए राज्यपाल से कहा है कि अध्याय 12 के पैरा 58(1) में प्रक्रिया और कार्य संचालन के नियमों के तहत, अविश्वास प्रस्ताव के लिए तो प्रावधान है लेकिन विश्वास प्रस्ताव के लिए नहीं है। नियमों के अनुसार, अविश्वास प्रस्ताव तभी पारित किया जा सकता है जब सदन के मौजूदा सदस्यों का पांचवां हिस्सा इसके पक्ष में हो। उन्होंने आगे लिखा कि गुरुवार के विशेष सत्र की प्रस्तावित कार्यवाही में किसी भी विपक्षी दल के किसी भी सदस्य ने पंजाब की वर्तमान आम आदमी पार्टी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाए जाने संबंधी प्रस्ताव नहीं रखा है। इसके अलावा, हमने स्पीकर या पंजाब विधानसभा के सचिव को कोई रिप्रेजेंटेशन दी है।
स्पीकर व डिप्टी स्पीकर पर उठाए सवाल
खैरा ने राज्यपाल को यह भी बताया कि पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां और डिप्टी स्पीकर जय किशन रोड़ी दोनों ही तरनतारन थाने में दर्ज एफआईआर के आधार पर गैर जमानती वारंट का सामना कर रहे हैं। इस तरह मौजूदा हालात में स्पीकर और डिप्टी स्पीकर कानून के अपराधी हैं, इसलिए वे पंजाब विधानसभा की कार्यवाही की अध्यक्षता करने की वैध स्थिति में नहीं हैं।